Corona war: जेल में बंद बंदियों ने भी सम्भाला मोर्चा

Corona war: चार दिन में आठ सिलाई मशीन से बंदियों ने तैयार कर दिए 800 मास्क

छिंदवाड़ा/. वैश्विक आपदा कोरोना वायरस से लडऩे की जंग में जेल के बंदी भी कूद पड़े हैं। कैदी सारे काम छोडकऱ इस समय जेल में केवल मास्क बनाने का काम कर रहे हैं। जेल प्रबंधन की अनुमति पर बंदियो ने चार दिनों में 800 मास्क तैयार कर दिए। हैरानी की बात यह है कि जेल प्रबंधन के पास सीमित संसाधन हैं। जेल में महज आठ सिलाई मशीन ही हंै।
जेल अधीक्षक यजुवेंद्र वाघमारे ने बताया कि अगर हमारे पास और सिलाई मशीन हो तो हम इससे भी अधिक मास्क तैयार कराएंगे। इसके लिए अभी बंदी केवल दिन में काम कर रहे हैं। हमारी तैयारी है कि कैदी रात में भी मास्क बनाएं। बंदी इसके लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस को दूर भगाने के लिए हम लोग जो सहायता कर सकते हैं वह करेंगे। जेल प्रबंधन का कहना है कि अगर कोई सामाजिक संस्था कुछ दिन के लिए सिलाई मशीन भी जेल प्रबंधन को देना चाहती है तो दे सकती है।

बंदियों को सिखा रहे सिलाई
जेल में बंद कुछ बंदियों को सिलाई करनी आती है वहीं कुछ को नहीं। ऐसे में जेल प्रबंधन जिन बंदियों को सिलाई नहीं आती है उन्हें सिखाकर पारंगत भी कर रहा है। वेल्डिंग, इलेक्ट्रिशियन करने वाले कैदी भी मास्क बनाने में जुट गए हैं।

सामाजिक संस्था चाहे तो दे सकती है सिलाई मशीन
जेल प्रबंधन का कहना है कि हमारे पास केवल आठ सिलाई मशीन है। अगर और सिलाई मशीन मिल जाएगी तो हम मास्क का और अधिक उत्पादन कर सकेंगे। अभी एक दिन में दो सौ मास्क बनाए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि एक दिन में 400 मास्क बनाए जाएं।

महज दो रुपए कीमत
जेल अधीक्षक ने बताया कि इन दिनों कोरोना वायरस को लेकर बाजार में मास्क की महंगे दाम पर बिक्री की खबर हम लोगों ने सुनी थी। कैदियों को जब यह मालूम चला तो उन्होंने खुद ही मास्क बनाने की बात कही। इसके बाद से कैदी एक मीटर कपड़े से सात मास्क बना रहे हैं। इसकी कीमत भी काफी कम रखी गई है। दो रुपए से कम में एक माक्स बनकर तैयार की जा रही है। हमें लोग कपड़े उपलब्ध करा रहे हैं।

चार जगहों से मिला ऑर्डर
जेल प्रबंधन को मास्क बनाने के लिए ऑर्डर भी आ रहे हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि अभी तक आइएमए, जिला अस्पताल, कोर्ट और पुलिस विभाग से मास्क बनाने के ऑर्डर आ चुके हैं।

कालाबाजारी रोकने उठाया कदम
कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सभी सम्भव मदद कर रहे हैं। हमने और कैदियों ने जब मॉक्स की कालाबाजारी की बात सुनी तो मास्क बनाने का फैसला लिया। चार दिनों में आठ सिलाई मशीन से 800 मॉक्स बनाए गए हैं। इनकी कीमत भी दो रुपए रखी गई है। अगर हमारे पास और सिलाई मशीन हो तो मॉक्स और अधिक बनाए जाएंगे। इसके लिए बंदी दिन रात काम करने को तैयार हैं।
-यजुवेन्द्र वाघमारे, जेल अधीक्षक, छिंदवाड़ा

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prabha shankar Desk
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