धमकी देकर मांगी रिश्वत, जज ने दिया यह निर्णय

धमकी देकर मांगी रिश्वत, जज ने दिया यह निर्णय
Court decision

Prabha Shankar Giri | Updated: 02 Jun 2019, 12:58:48 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

दस हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया गया

छिंदवाड़ा. बिजली चोरी का फर्जी प्रकरण बनाने की धमकी देकर आटा चक्की का संचालन करने वाले से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाले विद्युत वितरण कंपनी के कनिष्ठ अभियंता धर्मेंद्र कुमार यादव को न्यायालय ने दोषी पाते हुए चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। फैसला शनिवार को सुनाया गया।
रामपाल रत्ने ने चार फरवरी 2017 को जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में एक आवेदन दिया था। आवेदन में उसने उल्लेख किया था कि वह आटा चक्की का संचालन कर अपना जीवन यापन करता है उसके घर के पीछे एक तार की लीड पड़ी थी उस लीड का वीडियो बनाकर विद्युत वितरण केन्द्र लिंगा में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता धर्मेन्द्र कुमार यादव ने उसके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया और केस बनाने की बात कहते हुए 30 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा है।
आवेदक की शिकायत पर आठ फरवरी 2017 को जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने आरोपी जेई लिंगा यादव को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। रामपाल और धर्मेन्द्र कुमार यादव के बीच दस हजार रुपए का लेन-देन तय हुआ था। धारा 7 पीसी एक्ट 1988 का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। धारा 7, 13 (1), 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना के बाद अभियोग पत्र विशेष सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) छिंदवाड़ा की न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास
विशेष सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) छिंदवाड़ा ने विचारोपरांत प्रकरण में अभियोजन पक्ष एवं बचाव पक्ष के प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्कों पर विचार करने के बाद धर्मेन्द्र कुमार यादव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13 (1) , 13 (2) के अपराध में दोषी पाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपए के अर्थदंड और धारा 13 (1), सहपठित धारा 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। जुर्माना अदा न करने की दशा में छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास का फैसला सुनाया है। प्रकरण में शासन की ओर से समीर कुमार पाठक जिला अभियोजन अधिकारी ने पैरवी की।

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