अच्छी खबर: ... तो गायें भी बनेंगी ‘सरोगेट मदर’

अच्छी खबर: ... तो गायें भी बनेंगी ‘सरोगेट मदर’
Cow will become 'surrogate mother'

Prabha Shankar Giri | Updated: 21 Jul 2019, 11:34:58 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

पशु चिकित्सा विभाग ने कॉलेज के साथ भेजा प्रस्ताव

छिंदवाड़ा. पशु चिकित्सा के क्षेत्र में आई नई टेक्नोलॉजी से कदम मिलाते हुए अगर छिंदवाड़ा में एम्ब्रियो ट्रांसफर सेंटर खुल जाए तो गायें भी सरोगेट मदर बन सकती हंै। पशु चिकित्सा विभाग ने पशु चिकित्सा कॉलेज के साथ इस सेंटर का प्रस्ताव भेजा है। करीब 5 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव पर राज्य शासन से निर्णय हो जाए तो पशु धन के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी।
विभागीय जानकारी के अनुसार एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (इटीटी) ने गोवंश में अनुवांशिक सुधार को अनुकूलित करने के लिए एक उपकरण के रूप में बोविंस में प्रजनन रणनीति में क्रांति ला दी है। इस तकनीक का सार यह है कि ज्यादा दूध देने वाली गाय के भ्रूण को उसके गर्भाशय से निकाल लिया जाता है और दूसरी गायों में उसे स्थानांतरित कर दिया जाता है। एक वर्ष में एक गाय से औसतन 10-15 व्यवहार्य भ्रूणों को निकाला जा सकता है। इस स्थानांतरण प्रक्रिया से 3-5 बछड़ों को जन्म होगा। इससे गो-वंश की नस्ल सुधार की दिशा में काम होगा। इसके साथ ही उन गायों को भी सरोगेट मदर बनने का मौका मिलेगा, जो बछड़े को जन्म नहीं दे पा रही हैं।

यह है तकनीक प्रक्रिया
पशु चिकित्सा विभाग के सर्जन डॉ. विश्वजीत भोसीकर बताते हैं कि प्रशिक्षित पशुचिकित्सक एक अल्ट्रासाउंड-निर्देशित कूपिक आकांक्षा तकनीक का उपयोग करके दाता गाय से ओसाइटिस एकत्र करता है। फिर उसे एक पेट्री डिश में रखा जाता है और अगले दिन वीर्य के साथ निषेचित किया जाता है। निषेचित अंडे सात दिनों के लिए एक विशेष इनक्यूबेटर में परिपक्व होते हैं। परिणामस्वरूप व्यवहार्य भू्रण दूसरी गाय में स्थानांतरित होते हैं।


पशु चिकित्सा विभाग द्वारा वेटनरी कॉलेज के साथ एम्ब्रियो ट्रांसफर सेंटर का प्रस्ताव राज्य शासन के पास भेजा गया है। यह सेंटर खुल जाए तो पशु धन क्षेत्र में क्रांति आएगी। नस्ल सुधार के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ सकेगा।
केके शर्मा, उपसंचालक पशु चिकित्सा

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