बारिश के कमजोर पड़ते ही 300 गांवों पर आएगी आफत, जानें क्या है मामला

बारिश के कमजोर पड़ते ही 300 गांवों पर आएगी आफत, जानें क्या है मामला
Crisis on 300 villages

Prabha Shankar Giri | Updated: 19 Aug 2019, 07:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

फसलों में अभी भी है आर्मी वर्म की मौजूदगी

छिंदवाड़ा. जुलाई के आखिरी सप्ताह से शुरू हुई तेज और लगातार बारिश की वजह से मक्का की फसल आर्मी वर्म फॉल कीट की बर्बादी से बची हुई है, लेकिन अभी भी इसका खतरा टला नहीं है। आगामी डेढ़ माह किसान और कृषि विभाग के लिए बेहद चिंता वाले हैं। इस दौरान यदि लगातार बारिश होती है तो ठीक, अन्यथा खुले मौसम में ये वर्म फिर से सक्रिय हो जाएंगे। जिले के छिंदवाड़ा, चौरई और बिछुआ, अमरवाड़ा और परासिया के लगभग 300 गावों में इस कीट का प्रकोप देखा गया है। विभाग के मैदानी अधिकारी किसानों से अब अपनी मक्का की देख-रेख ज्यादा ध्यान से करने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में एक लाख हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में लगी मक्का पर इस कीट का प्रकोप ज्यादा देखा गया है। एक सप्ताह में बारिश की रफ्तार धीमी होने और तापमान बढऩे के कारण फिर से छिंदवाड़ा, चौरई विकासखंड के कुछ गांवों में मक्का फसल में कीट देखे जा रहे हैं।


इन विकासखंडों में ज्यादा दिखा असर
इस वर्ष जिले में तीन लाख 37 हजार 122 हैक्टेयर में अनाज की बोवनी की गई है। इसमें से तीन लाख सात हजार 65 हजार हैक्टेयर में सिर्फ मक्का है। यानी कुल अनाज में से 90 प्रतिशत से ज्यादा मक्का है। जिले में छिंदवाड़ा, चौरई, बिछुआ विकासखंड में सबसे ज्यादा मक्का बोया गया है। आर्मी वर्म का प्रकोप पांच विकासखंडों में ज्यादा देखा गया। छिंदवाड़ा, चौरई, बिछुआ के अलावा अमरवाड़ा और परासिया में इस कीट का प्रकोप ज्यादा है। छिंदवाड़ा और चौरई विकासखंड के 50 से 60 गांवों में इसका प्रकोप दिख रहा है। बिछुआ के 55 गांवों के किसानों ने खेतों में इन कीटों का दुष्प्रभाव बताया है। इसके अलावा अमरवाड़ा और परासिया के भी लगभग 100 गांव इसकी जद में हैं।

एक ही दवा उपलब्ध... आर्मी वर्म फाल कीट पर नियंत्रण के लिए सरकार ने एक ही दवा अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराई है। इमामेक्टिन बेंजोएट की खेप दो बार जिले में आ गई है। इस कीट के लिए अन्य दवाओं की भी जरूरत पड़ रही है, लेकिन उन पर अनुदान को लेकर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। मजबूरन यही दवा किसानों को दी गई। हालांकि शुरुआत में ही यह दवा कारगर है, लेकिन इल्ली बड़ी हुई तो यह दवा किसी काम की नहीं। जानकारों की मानें तो किस्मत अच्छी रही कि बारिश हो गई वरना स्थिति इतनी बिगड़ जाती कि काबू के बाहर हो जाती। अब जब मक्का में फूल आने की स्थिति है अगला एक महीना
बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। क्योंकि फल में अगर इल्ली पहुंच गई तो भुट्टा बनने के पहले ही उसे नष्ट कर देगी।

इनका कहना है
अगला एक महीना मक्का के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। जब तक भुट्टा पक नहीं जाता जब तक ये बात नहीं कही जा सकती है कि आर्मी वर्म का प्रकोप नहीं है। किसानों को अब सबसे ज्यादा निगरानी की जरूरत है और कीट या इल्ली का प्रकोप दिखने पर वे छिडक़ाव तुरंत करें। अब वातवरण की स्थिति भी अलग-अलग जगह बदलेगी। ऐसे में मक्का पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
डॉ. वीके पराडकर, सहसंचालक, कृषि अनुसंधान केंद्र चंदनगांव

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