घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों को खोजेगा विभाग, जानें वजह

- 11 जनवरी से 13 फरवरी तक चलाया जाएगा अभियान, स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

By: Dinesh Sahu

Published: 10 Jan 2021, 10:39 AM IST

छिंदवाड़ा/ जिले में कुपोषित बच्चों को खोजने के लिए स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास अमला एक बार फिर सक्रिय हुआ है, जिसकी तैयारी के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बताया जाता है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान कर त्वारित प्रबंधन किया जाना, जिससे बाल मृत्यु दर में आवश्यक कमी लाई जाना कार्यक्रम का उद्देश्य है।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार जिले में 11 जनवरी से 13 फरवरी तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें एएनएम, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा 5 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चों वाले परिवारों के घर जाकर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की दस्तक देेंगी।

साथ ही बच्चों में पाई जाने वाली बीमारियों की सक्रिय पहचान एवं उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला टीकाकरण अधिकारी के निर्देश पर मास्टर टे्रनर डॉ. रेणु सूर्यवंशी, मेरूला मालवीय सुधीर सिंह ने प्रशिक्षण दिया तथा एमटीएस मलेरिया श्याम शर्मा, सीएचओ समेत अन्य मौजूद थे।


यह गतिविधियां होगी अभियान के दौरान -


1. समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन एवं रैफरल।


2. 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया की त्वारित पहचान करना।


3. गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान करना।


4. 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन।


5. दस्त रोग नियंत्रण के लिए ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के लिए जागरूक एवं दवा उपलब्ध कराना।


6. बच्चों में जन्मजात विकृतियों एवं वृद्धि विलम्ब की पहचान करना आदि बिंदू शामिल है।


गंभीर कुपोषण के कारण और दुष्परिणाम -


1. मां द्वारा छह माह से कम उम्र के शिशु को स्तन पान नहीं कराना, बल्कि ऊपरी पदार्थ जैसे पानी, शहद, चाय, घुट्टी, दूध पिलाना आदि। इसकी वजह से बच्चों में दस्त रोग की अधिकता होने लगती है तथा वसा की भी कमी हो जाती है।


2. छह माह की उम्र के बाद उपरी ठोस आहार प्रारंभ नहीं करना तथा टीकाकरण का अभाव या आंशिक टीकाकरण करवाना। इसकी वजह से उम्र अनुपातिक मानसिक एवं शारीरिक वृद्धि नहीं हो पाती है। आम भोजन को पचाने की क्षमता कम होना, शरीर के मुख्य अंग जैसे हृदय, गुर्दा, जिगर एवं पाचन प्रणाली पर दुष्प्रभाव पडऩा आदि शामिल है।

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