उदयपुर की इस नामी संस्था के नाम से ठगे जा रहे थे दिव्यांग, पकड़ाया तो खुले कई राज

Dinesh Sahu | Publish: Sep, 16 2018 11:48:39 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

जिला अस्पताल का मामला - विकलांगता प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर हो रही थी अवैध वसूली, फर्जी संस्था के लोग काट रहे थे रसीद

छिंदवाड़ा. शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने, स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए लोन, विकलांगता प्रतिशत बढ़ाने समेत अन्य का लाभ दिलाने का लालच देकर दिव्यांगों को ठगने का मामला प्रकाश में आया है। जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र के कर्मचारियों की सजगता के चलते फर्जी समिति के तीन से चार लोगों को पकड़ा गया और कोतवाली पुलिस के हवाले किया गया, लेकिन शिकायत नहीं होने और पीडि़तों के पैसे वापस करने की शर्त पर आरोपी छोड़ दिए गए।


दरअसल, जिला अस्पताल की ट्रामा यूनिट में प्रति सप्ताह अनुसार शनिवार को जिला मेडिकल बोर्ड आयोजित हुआ, जहां दूर-दराज से विकलांगता तथा रेलवे रियायत प्रमाण-पत्र बनाने दिव्यांग पहुंचे थे। इसी दौरान उक्त मामला प्रकाश में आया। इसके बाद परिसर में हडक़म मच गया। लोगों की मदद से परासिया के शिवपुरी निवासी आरोपी जीतेंद्र बंदेवार तथा उनके साथियों को कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया, लेकिन कोई शिकायत दर्ज नहीं होने से उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि आरोपी ने पीडि़तों से वसूली राशि को वापस करने का आश्वासन दिया है।

 

रसीद कटवाने के लिए बनाते दबाव


जुन्नारदेव निवासी पीडि़त तहसीन अहमद ने बताया कि आरोपी रसीद कटवाने के लिए दबाव बनाता था तथा शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तथा ढाई लाख रुपए तक का लोन दिलाने का प्रलोभन देता था। इतना ही विकलांगता का प्रतिशत भी बढ़ाने का दावा करता था। जबकि बोर्ड से पहले ही उसका प्रमाण-पत्र जारी हो चुका है।


समाजसेवी संस्था के नाम का दुरुपयोग


कहा जाता था कि राजस्थान के उदयपुर में संचालित नारायण सेवा संस्था दिव्यांगों का निशुल्क उपचार तथा मदद करती है। आरोपी ने बताया कि वह गांव-गांव जाकर दिव्यांगों से मदद के नाम पर पैसा लेता और उक्त संस्था की रसीद भी देता है जबकि संस्था फर्जी बताई जाती है। आरोपी ने बताया कि यह कार्य काफी समय से करते आ रहा है। बेरोजगार होने की वजह से यह कार्य करना बताया। गौरतलब है कि आरोपी भी दिव्यांग है।



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