हम क्यों हो रहे बीमारी, क्या है उपचार, देखें वीडियो

आहार विशेषज्ञ कुशाग्र घोगरे से पत्रिका की विशेष बातचीत

By: mantosh singh

Updated: 09 Dec 2017, 12:56 AM IST

छिंदवाड़ा. हमलोग प्रकृति को फॉलो नहीं कर रहे हैं। गलत इनपुट, गलत मात्रा और गलत समय पर ले रहे हैं। यानी हम गलत एक्शन कर रहे हंै जिसकी वजह से गलत रिएक्शन हो रहा है और डायबिटीज, हार्ट की बीमारी, आर्थराइटिस (जॉइंट्स का दर्द), किडनी डिसऑर्डर, सीवियर कॉन्स्टिपेशन, अस्थमा इंसोम्निया (नींद न आना) जैसी बीमारियां हो रही हैं। प्रकृति को फॉलो कर इन बीमारियों से बचा जा सकता है। यह कहना है छिंदवाड़ा के आहार विशेषज्ञ कुशाग्र घोगरे का। कुशाग्र को हाल ही में नई दिल्ली में बेस्ट डाइइटिशन इन बेंगलुरु से सम्मानित किया गया।


नेचर फूड का करें उपयोग
बेंगलुरु में सेवाएं दे रहे कुशाग्र अपने गृह शहर छिंदवाड़ा आए हुए हैं। वह पांच साल से बीमारियों के कारण और निंदान पर रिसर्च कर रहे हैं। बिना किसी दवा के कुशाग्र दो सौ से ज्यादा लोगों को निरोग कर चुके हैं। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि हमलोग बॉडी डाइट, माइंड डाइट और लाइफ डाइट सही तरह से नहीं ले रहे हैं। जब तक समस्या का समाधान नहीं करेंगे, बीमारियों से मुक्ति नहीं मिल सकती। उन्होंने बताया कि हमें नेचर फूड का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। सुबह के समय फलों का सेवन करना चाहिए। सुबह का समय पाचन क्रिया के लिए सबसे अच्छा होता है। हम भगवान को फल चढ़ाते हैं। फल शुभ देना है, फल सबसे पवित्र हैं।


ऑक्सीजन की मात्रा हो जाती है कम
कुशाग्र ने बताया कि सूर्यास्त के बाद वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए पाचन क्रिया सही तरीके से नहीं होती। सूर्यास्त के बाद बॉडी रिपेयरिंग मोड में चली जाती है, जैसे रात होने पर हमें नींद आना चालू हो जाती है। वैसे ही शाम के बाद बॉडी रिपेयरिंग मोड में चली जाती है। अभी हम लोग ज्यादा देर तक काम कर रहे हैं, खाना भी लेट खा रहे हैं। देर से भोजन करने से बॉडी मेंटेनेंस मोड में न जाकर ऑपरेशन मोड में चली जा रही है। जिस आर्गन को रेस्ट करना था, रिकवरी करना था, वह खाना पचाने में लग जाता है।


गलत इनपुट से गलत इंपैक्ट
कुशाग्र का कहना है कि गलत इनपुट से बॉडी में गलत इंपैक्ट होना ही है। शरीर के लिए हमें समय देना पड़ेगा। शरीर सही है तो हम बहुत सारे काम कर सकते हैं। जल्दी के चक्कर में जल्दीबाजी कर रहे हैं और बीमारी से ग्रस्त होते जा रहे हैं। हम फूड बिना आयल, बिना शुगर के नहीं लेते। दुनिया का कोई भी जानवर प्रोसेस करके खाना नहीं खाता, केवल मनुष्य प्रोसेसर कर खाना खा रहे हैं, इसलिए बीमार पड़ रहे हैं।


शहरों में स्थिति ज्यादा खराब
आज लोग प्रकृति से कट गए हैं, खासकर शहरों में टेक्नोलॉजी तो बढ़ गई है पर विज्ञान घट गया है। हमारा आउटपुट बहुत कम हो गया है, इनपुट बढ़ गया है। खाना तो खूब खा रहे हैं, लेकिन उस हिसाब से मेहनत नहीं करते। पूरे बॉडी में एनर्जी होल्ड हो रही है। अत: मेहनत के हिसाब से भोजन ग्रहण करें।


कब क्या-क्या खाएं
सुबह सात बजे शरीर की आवश्यकता के अनुसार फल लें। 10 बजे लंच कर ले। शाम को सूर्यास्त के पहले डिनर कर लें। खाना भी आउटपुट के हिसाब से खाना चाहिए। अगर आप ज्यादा मेहनत करते हैं तो आपके शरीर को ज्यादा भोजन की जरूरत पड़ेगी। शाम को दलिया का यूज़ करना चाहिए।

 

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