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Education: बड़ी खबर, मंत्रालय की इस विश्वविद्यालय पर कैंची, 35 कॉलेज हो जाएंगे अलग

प्रस्तुत प्रस्ताव को मान्य कर लिया गया। अब खानापूर्ति ही रह गई है।

छिंदवाड़ा

Published: April 06, 2022 01:16:34 pm

छिंदवाड़ा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्री-परिषद की बैठक में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा पर कैंची चल गई। मंत्री-परिषद द्वारा छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकारिता में शामिल बैतूल जिले को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में शामिल किए जाने हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव को मान्य कर लिया गया। अब खानापूर्ति ही रह गई है। जिसके बाद राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार से बैतूल जिले के संबद्ध कॉलेज बाहर हो जाएंगे और वे फिर से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल से संबद्ध हो जाएंगे। बता दें कि काफी समय से बैतूल जिले के विद्यार्थी राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय द्वारा लागू किए गए फीस को लेकर विरोध जता रहे थे। उनका कहना था कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में उन्हें फीस कम लगती थी, लेकिन छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में फीस अधिक है। ऐसे में या तो फीस कम की जाए या फिर उन्हें बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में फिर से जोड़ दिया जाए। बताया जाता है कि फीस कम करने को लेकर विश्वविद्यालय ने शासन से सुझाव मांगा था, लेकिन वहां से कोई उत्तर नहीं आया। बैतूल जिले के जनप्रतिनिधियों ने शासन से जिले के कॉलेजों को बरकतउल्ला विवि में शामिल करने की मांग रखी। मंगलवार को मंत्री-परिषद में प्रस्ताव रखा गया और जिस पर मुहर लग गया।
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बैतूल जिले के 35 कॉलेज होंगे अलग
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा से सिवनी, बालाघाट, बैतूल एवं छिंदवाड़ा के 132 कॉलेज संबद्ध थे। इसमें बैतूल जिले के लगभग 35 कॉलेज शामिल हैं। मंत्री-परिषद द्वारा बैतूल जिले के कॉलेजों को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में शामिल किए जाने हेतु प्रस्ताव को मान्य किए जाने के बाद अब सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा के लगभग 100 कॉलेज ही छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय से संबद्ध रहेंगे।

क्या होगा असर
शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय पर बैतूल जिले के कॉलेजों को अलग करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं नई शिक्षा नीति में यह योजना है कि जिले के लीड कॉलेजों को क्लस्टर विश्वविद्यालय बनाया जाए और वही परीक्षा का आयोजन कराए और परिणाम दे। लोकल विश्वविद्यालय अपना मूल काम करे। इसमें पीएचडी सहित उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना सहित अन्य कार्य शामिल है। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय से बैतूल जिले को अलग करने से काफी प्रभाव पड़ेगा। वहीं शासन का इस निर्णय को राजनीति से भी जोडकऱ देखा जा रहा है।

ढाई साल में ही विश्वविद्यालय में हुए कई बदलाव
तत्कालिन मुख्यमंत्री कमलनाथ की विशेष पहल पर 14 अगस्त 2019 को विधानसभा का विशेष संकल्प पारित कर छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। जिले के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित सौगात मिली। विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से संबद्ध बैतूल जिला और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से संबद्ध सिवनी, बालाघाट व छिंदवाड़ा जिलों में स्थित महाविद्यालयों को इसमें सम्मिलित किया गया। विश्वविद्यालय भवन के लिए ग्राम सारना में लगभग 125 एकड़ भूमि का आवंटन एवं 486.45 करोड रूपए का बजट आवंटन किया गया। विश्वविद्यालय के लिए 325 पदों की स्वीकृति भी शासन द्वारा की गई। हालांकि सरकार बदलने के बाद से ही विश्वविद्यालय पर काले बादल मंडरा रहे हैं। अब तक विश्वविद्यालय भवन के लिए प्रर्याप्त बजट जारी नहीं किया गया है और न ही प्रर्याप्त कर्मचारी दिए जा रहे हैं। ढाई साल में ही पांच कुलसचिव बदले जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं।
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