Education: नई शिक्षा नीति पर बुद्धजीवियों ने कही यह बड़ी बात, पढ़ें पूरी खबर

आने वाले पीढिय़ों के लिए जॉब क्रिएट होंगे।

By: ashish mishra

Updated: 01 Aug 2020, 12:15 PM IST

छिंदवाड़ा. नई शिक्षा नीति को कोई बढिय़ा तो कोई विजन का अभाव बता रहा है। गुरुवार को नई शिक्षा नीति को लेकर हमने बुद्धजीवियों से उनकी राय जानी। कुछ का कहना था कि यह बहुत अच्छी नीति है। आने वाले पीढिय़ों के लिए जॉब क्रिएट होंगे। विद्यार्थी को मनपसंद विषय पढऩे का मौका मिलेगा। नए रास्ते खुलेंगे। रोजगार के लिए मार्केट तैयार करना बेहद जरूरी है। इस नीति से उद्देश्य की पूर्ति होगी। वहीं कुछ का कहना था कि शिक्षा का अर्थ है कि व्यक्ति के पास ऐसी स्किल आ जाए जिससे वह स्वयं स्वाभीमान पूर्ण कार्य करे और उस कार्य से समाज, परिवार और देश का उत्थान हो। हमारे पास बहुत सारे ऐसे युवा हंै जो दस से 12 घंटे काम कर सकते हैं, लेकिन सरकार के पास उनके लिए कोई योजना नहीं है की वह कहां काम करेगा। आत्मनिर्भरता तभी आएगी जब स्किल डेवलपमेंट पर सरकार काम करे। नई शिक्षा नीति में हम बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प दे रहे हैं, लेकिन शिक्षित को कहां खपाएंगे इसका विजन नहीं दिख रहा है। आज देश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उसका सबसे बड़ा कारण है कि हम युवाओं को शिक्षा तो दे रहे हैं, लेकिन हुनर नहीं। लोगों का कहना है कि नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से ही सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की बात की जा रही है। जबकि कॉलेजों में यह सिस्टम फेल हो चुका है। सेमेस्टर सिस्टम में सारा समय गतिविधियों में चला जाता है। ऐसे में स्कूल या फिर कॉलेज में बच्चा अध्ययन कब करेगा। लोगों का कहना है कि सरकार योजनाएं तो बनाती है, लेकिन उसका इप्लीमेंट कैसे होगा इस पर बात नहीं होती। लोगों का कहना है कि सेमेस्टर सिस्टम आईआईटी पैटर्न पर लागू किया गया था, लेकिन यह बात देखनी जरूरी थी कि आईआईटी में देश से बच्चे चुनकर जाते हैं। उनका माइंड क्लियर रहता है।

500 बच्चे पर एक प्रोफेसर
बुद्धजीवियों का कहना है कि वर्तमान में जरूरत है कि स्कूल या कॉलेज में संसाधनों को पूर्ण किया जाए। शिक्षकों की क्वालिटी डेवलप करने के लिए उन्हें समय-समय ट्रेनिंग देनी होगी। जब उन्हीं का स्किल डेवलप नहीं होगा तो वह बच्चों को क्या देंगे। इसके अलावा वर्तमान में अनुमानत: एक प्रोफेसर पर 500 विद्यार्थी है। स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। इन बिन्दुओं पर ध्यान देने की जरूरत है। हमने विदेशों के तर्ज पर नई शिक्षा नीति बनाई है। हमें इंडिया के लिए एक्सपर्ट चाहिए। 10वीं के बाद ही रास्ता खोलना चाहिए। केवल साइंस और आर्ट ही नहीं है। 12वीं के बाद स्कील डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए था।


इनका कहना है...

34 साल बाद बदली देश की शिक्षा नीति से देश प्रगति करेगा। यह शिक्षा नीति छात्रों को माध्यमिक शिक्षा से ही व्यवसायिक शिक्षा की ओर अग्रसर करेगी। जिससे कि छात्र अपनी रूचि के अनुसार स्वरोजगार उद्यमिता स्टार्टअप, पेशेवर व्यवसाय या शासकीय नौकरियों की तरफ आसानी से अपने आप को ढाल सकेगा। वर्तमान एवं आगामी भविष्य में देश निजी करण की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में रेलवे जैसी सरकारी संस्थाएं भी निजीकरण की ओर आगे बढ़ रही हैं। नई शिक्षा नीति छात्रों के भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम लेकर आएगी। जिससे छात्र वास्तव में अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर सफल होगा।

डॉ. दिनेश कुमार चौधरी, प्रोफेसर

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नई शिक्षा नीति में जो बात मुझे सबसे अधिक प्रभावित कर रही है वह है अंतर अनुशासनीय अध्ययन पद्धति। उच्च शिक्षा में हमने देखा है कि विभिन्न विषयों से हमारा परिचय नहीं हो पाता था। अब मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, वाणिज्य प्रबंधन जैसे विषय भी छात्र विज्ञान या कला संकाय में पढ़ सकता है। विस्तृत अध्ययन के बाद इसकी खुबियों को और भी बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विकल्प के साथ-साथ अध्ययन अंतराल के बाद भी जारी रखने की जो व्यवस्था है वह कल्याणकारी है। मैं नई शिक्षा नीति का स्वागत करता हूं।

डॉ. श्रीपाद आरोणकर, प्रोफेसर

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नई शिक्षा नीति, शिक्षा की समस्त खामियों को रेखांकित तो करती है, लेकिन पहले से शिक्षित छात्र संसाधन को उसकी प्रवीणता के अनुरूप बाज़ार में रोजगार प्राप्त करने की उसकी मंशाओं की पूर्ति न होने से इसके क्रियान्वयन पर संदेह भी पैदा करती है। कला व विज्ञान के विषयों को एक साथ पढऩे का विकल्प खुला कर देने से छात्र विषय विशेषज्ञता हासिल नहीं कर पाएंगे। शिक्षकों को समय की मांग के अनुसार आधुनिक वैज्ञानिक, डिजिटल व दक्षता आधारित प्रशिक्षण पर फोकस करना बहुत आवश्यक है। समाज, देश और विश्व को विशेषज्ञों की आवश्यकता है न कि सिर्फ कितने विषयों को छात्र ने पढ़ा है। आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा छात्र को आत्मनिर्भर बनाए न कि इसके आत्मविश्वास में कमी का अहम कारण बने।

डॉ. अमर सिंह, प्रोफेसर
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