खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान

खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान

manohar soni | Publish: Apr, 17 2018 11:39:48 AM (IST) Chhindwara, Madhya Pradesh, India

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी चेतावनी-आगजनी की घटनाएं बढ़ेंगी

छिंदवाड़ा.खेतों में गेहूं की कटाई के बाद नरवाई जलाने का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। इससे उठने वाले धुएं से प्रदूषण हो रहा है वहीं आगजनी की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किसानों के इस कृत्य को गंभीर माना है। इसके साथ ही इसे रोकने की आवश्यकता पर बल दिया है।

बोर्ड के मुताबिक पिछले साल २०१७ में हरियाणा में किसानों द्वारा खेतों की नरवाई जलाने से दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने साफ तौर पर इसकी गाइडलाइन जारी की थी और प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। कहा गया था कि नरवाई जलाने से उठने वाले धुएं से जनसामान्य को दमा, सांस फूलने के साथ अन्य बीमारियां हो जाती है वहीं आसमान में पर्यावरण के लिए जरूरी ओजोन परत को नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा गांवों में आगजनी की घटनाएं बढ़ रही है।
नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक छिंदवाड़ा समेत आसपास के गांवों में तीन सौ से अधिक आग लगने की घटनाएं सामने आई है। इसके अलावा दूसरे शहरी और ग्रामीण इलाकों के आंकड़े अलग है। इसके बाद भी किसान नरवाई जलाने में अड़े हुए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समझाइश का भी असर नहीं हो रहा है।
बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय अधिकारी सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि एनजीटी ने साफ तौर पर खेतों में नरवाई जलाने से स्पष्ट रूप से मना किया है। इससे पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। कृषि और पंचायत विभाग के कर्मचारियों के साथ पटवारियों को भी किसानों को लगातार समझाइश देनी चाहिए। तभी नरवाई जलाने पर रोक लगेगी। इससे खेत में मिट्टी में पड़े केंचुए जैसे जीव मर जाते हैं जिनकी खेती और पर्यावरण संतुलन में अहम् भूमिका है।

नहीं मिल पाएगी नुकसान की भरपाई
राज्य शासन की गाइड लाइन राहत राशि दिये जाने के संबंध में जारी सभी निर्देश प्राकृतिक प्रकोप से हानि होने के लिए है, जानबूझकर नरवाई जलाने के फलस्वरूप हुई हानि पर राहत राशि देने का कोई प्रावधान नहीं है। नरवाई का निपटान जैविक खाद, नाडेफ व वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से किया जा सकता है।

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