Fathers day: 23 वर्षीय शेखर के सामने पिता ने तोड़ा था दम, आप समझें अहमियत

कोरोना की दूसरी लहर ने कुछ बच्चों को हिला कर रख दिया।

By: ashish mishra

Updated: 20 Jun 2021, 01:35 PM IST


छिंदवाड़ा. एक पिता ही वो शख्श होता है, जो हमारे सपनों को साकार करने के लिए अपने सपनों की धरती को बंजर ही छोड़ देता है। पिता परिवार की उम्मीद, एक आस होता है। पिता परिवार की हिम्मत और विश्वास होता है। आज फादर्स डे है। कोरोना की दूसरी लहर ने कुछ बच्चों को हिला कर रख दिया। कुछ ने अपने पिता को खो दिया तो कुछ ने अपनी पिता की जिंदगी बचा ली। ऐसे ही कुछ बच्चों से हमने उनसे पिता को लेकर भावनाएं जानी।
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माता-पिता का करना चाहिए सम्मान
माता-पिता की अहमियत तब समझ में आती है जब वे हमसे दूर चले जाते है। इसलिए हर बच्चे को अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। उन्हें हर खुशी देनी चाहिए। यह कहना है 23 वर्षीय शेखर मालवीया की। मूलरूप से दमुआ निवासी शेखर के पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। 17 अप्रैल को कोरोना से जंग लड़ते हुए उनके पिता की मौत हो गई। शेखर कहते हैं कि अस्पताल में मेरे पिता ने मेरी आंख के सामने दम तोड़ा। मैं असहाय था, कुछ कर भी नहीं सका। शेखर ने बताया कि उनके पिता 57 वर्षीय स्व. नरेश मालवीया नगर पालिका में पदस्थ थे। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को पापा को बुखार आने पर डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने टाइफाइड बताया। इसके बाद कफ आने लगा तो मैं पापा को लेकर छिंदवाड़ा पहुंच गया। वहां जांच कराई तो वे कोरोना पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्हें छिंदवाड़ा के अस्पताल में भर्ती कराने के लिए बाइक पर लेकर घूमता रहा, लेकिन कही बेड खाली नहीं मिला। एम्बूलेंस वाले कही जाने को तैयार नहीं थे। किसी तरह बैतूल में व्यवस्था हुई। बैतूल अस्पताल में भर्ती कराया। 16 अप्रैल को वह अच्छा महसूस करने लगे थे। 17 अप्रैल की सुबह उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। दोपहर में उनका देहांत हो गया। शेखर कहते हैं कि मुझे अभी भी यकीन नहीं होता कि पापा चले गए।

ashish mishra Desk
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