कॉलेज में प्रोफेसर बोले- राम एक ऐसा शब्द है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती

कॉलेज में प्रोफेसर बोले- राम एक ऐसा शब्द है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती

Rajendra Sharma | Publish: Aug, 08 2019 07:15:01 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

रामचरित्र मानस को जीवन में उतारने की दी सीख

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर हुई उनके कृतित्व की चर्चा
शैक्षणिक संस्थान के साथ साहित्य के क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं में तुलसी जयंती पर कार्यक्रम
छिंदवाड़ा. भक्तिकाल के कवि और मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दासजी की जयंती पर जिला मुख्यालय में शैक्षणिक, साहित्यक और धार्मिक संस्थानों ने कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हिंदी प्रचारिणी संस्था ने इस दिन अपना वार्षिकोत्सव भी मनाया और तुलसी विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया तो पीजी और गल्र्स कॉलेज में हिंदी विभाग ने खास कार्यक्रम किए। सुगम मानस मंडल ने गणेश चौक स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रम किया।

तुलसी के कृतित्व पर चर्चा

पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा के हिंदी और प्रयोजनमूलक हिंदी विभाग ने रामचरित मानस के तुलसी के कृतित्व पर चर्चा की। सरस्वती ढाकरिया ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रदीप नागवंशी ने तुलसीदास के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। दिनेश साहू ने तुलसीदास के जीवन में प्रेरणा देने वाले दोहो को अर्थ सहित बतलाया। नीति ने नवधा भक्ति के बारे में बताया। सरस्वती ढाकरिया ने बताया कि तुलसीदासजी को गोस्वामी क्यों कहा जाता है। विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीचंद ने गुरु की वाणी को सूर्य की किरणों के समान बताया और कहा कि राम एक ऐसा शब्द है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती। हर चीज की दवा राम ही है। डॉ. सुशील ब्यौहार ने बताया कि राम हमारे जीवन में कल्पवृक्ष के समान है। डॉ. टीकमणि पटवारी ने रामचरित मानस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला, डॉ. सीमा सूर्यवंशी, डॉ. सागर भनोत्रा आदि ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन देवीराम राकेशिया और आभार प्रदर्शन दिनेश साहू ने किया।

तुलसी साहित्य समन्वय की विराट चेष्टा

राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में हिंदी विभाग के तत्वावधान में संत शिरोमणि तुलसीदास जयंती समारोह आयोजित किया गया। विभाग की प्रियंका पाठक ने कहा कि तुलसी का समस्त साहित्य समन्वय की विराट चेष्टा है। तुलसी ने शैव, वैष्णव, निर्गुण, सगुण, लोक भाषा, संस्कृत भाषा, द्वैत, अद्वैत, सकाम, निष्काम आदि का अद्भुत समन्वय किया है। डॉ. विजय कलमधार ने कहा कि तुलसी का रामचरित मानस जीवन प्रबंधन और नियोजन का विलक्षण ग्रंथ है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. सीताराम शर्मा ने कहा कि लोकनायकत्व और जनोन्मुखता के कारण ही तुलसी का साहित्य वर्तमान परिवेश में भी प्रासंगिक है। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश अग्निहोत्री ने तुलसी की अपने आराध्य राम के प्रति दास्य भक्ति को विनयशीलता की पराकाष्ठा बताया। शोभाराम जमहोरे ने कहा कि तुलसी प्रतिभा संपन्न जननायक कवि थे। कॉलेज प्राचार्य डॉ. कामना वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।

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