किसानों को राहत देने से सरकार का इनकार

किसानों को राहत देने से सरकार का इनकार
Government denies relief from farmers

Prabha Shankar Giri | Updated: 18 Jul 2019, 09:00:00 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

आर्मी वर्म से बचाव के लिए बाजार से पूरी कीमत पर खरीदनी पड़ रही दवा

छिंदवाड़ा. किसानों को मक्का में लग रहे कीट पर नियंत्रण करने के लिए अनुदान पर दवा देने के लिए अब विभाग और सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। किसानों को अब इन दवाओं को बाजार से पूरी कीमत पर लेने को कहा जा रहा है। कृषि विभाग ने जिले के किसानों को एक पखवाड़े में डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा की दवाइयां अनुदान पर बांट दी हैं। दवा का स्टॉक अब खत्म हो गया है। एेसे में पचास फीसदी नकद अनुदान पर अभी तक कृषि विभाग से दवा ले रहे किसान अब पूरी कीमत पर बाजार से दवाई लेने को विवश हैं। दवाओं को खरीदने के बाद उस पर मिलने वाले अनुदान को किसानों के खाते में बाद में जमा करने की बात अधिकारी कर रहे हैं।
इधर कीट का प्रकोप और न बढ़े इसके लिए दवाओं के लिए किसान कृषि विभाग के कार्यालयों में फोन लगा रहे हैं और दवाओं की मांग कर रहे हैं। ध्यान रहे विभाग के भोपाल में बैठे आला अधिकारियों को अनुदान पर दवा देने लिए पत्र भेजे एक सप्ताह हो गया है, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है।
सप्ताहभर में बंट गई दवा
मक्का पर अब तक के कीट के सबसे खतरनाक आक्रमण की जानकारी विभाग को लगी तो आनन-फानन में दवा उपलब्ध कराई गई। इधर, मुख्यमंत्री ने तुरंत सहायता के लिए नकद अनुदान की घोषणा भी की। विभाग ने इमामेक्टिन बेंजोएट की ५० क्विंटल दवा बुलाई। ये दवा एक सप्ताह में ही खत्म हो गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एक करोड़ साठ लाख रुपए की दवा किसानों को बांटी गई है। विभाग ने उन क्षेत्रों में दवाओं का वितरण ज्यादा किया जहां कीट का प्रकोप ज्यादा प्रभावित दिखा। अमरवाड़ा, चौरई, परासिया, बिछुआ और छिंदवाड़ा विकासखंड में ये दवा ज्यादा भेजी गई। अब दूसरे विकासखंडों के किसान भी दवा मांग रहे हैं लेकिन दवा का स्टाक खत्म हो गया है।

जितना रकबा उस हिसाब से दवा कम
दवा का छिडक़ाव जिस तरह करना है उस हिसाब से यह दवा सिर्फ २० हजार हैक्टेयर क्षेत्र में ही छिडक़ाव कर खत्म हो गई। जबकि जिले में मक्का दो लाख ७५ हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इस बार बोया गया है। जिले में अब तक का यह सबसे ज्यादा रकबा है। वर्तमान में ही ७० हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र के लिए दवा की जरूरत है। एेसे में सरकार की यह मदद ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अनुदान पर दवा भी सिर्फ दो हैक्टेयर के लिए मिल रही है। यानी इससे ज्यादा क्षेत्र में फसल किसान ने लगाई है तो उसके लिए उसे दवा बाजार से ही खरीदनी पड़ेगी।

मुसीबत का पता था तो पहले से तैयारी क्यों नही
ध्यान रहे मक्का पर इस साल आर्मी वर्म फॉल कीट के प्रकोप होने की बात चार महीने पहले से ही चल रही थी। विशेषज्ञों ने चेताया भी था कि इस साल इस कीट से बचना मुश्किल है। कीट की प्रकृति के बारे में भी जानकारी लगातार विभाग और सरकार को दी जा रही थी। मक्का उत्पादन के लिए प्रदेश देशभर में पिछले कुछ सालों से अव्वल रह रहा है। छिंदवाड़ा में तो पिछले दो साल से उत्पादन और बिक्री में रिकॉर्ड बना है। एेसे में इस कीट से बचाने के लिए दवाओं की उपलब्धता के लिए पहले से तैयारी विभाग और सरकार ने क्यों नहीं की। स्थानीय अधिकारी तो कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। वे ऊपर से आदेश और निर्देश मिलने की बात कह रहे हैं, लेकिन इस पूरे मामले में उच्चस्तर पर अधिकारियों, नेताओं की अनदेखी और लापरवाही दिख रही है। जानकारों के अनुसार कीटनाशक दवा कम्पनियों की मिलीभगत की बू भी इसमें आ रही है। उन्हें मालूम है कि इस बार उनकी दवा की मांग कई गुना ज्यादा होनी है। सरकार अनुदान तो किसानों को बाद में देगी, लेकिन वे तो नकद पूरी कीमत पहले ही किसान से वसूल लेंगे। जानकारी के अनुसार किसान संगठन इस सम्बंध में जल्द स्थानीय अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री से भी इस समस्या केा लेकर मिलने वाले हैं।

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