health: जीडीएम पॉजिटिव होना गर्भवती और शिशु के लिए घातक, जानें वजह

प्रसव पूर्व जांच से हो सकता है उचित उपचार

By: Dinesh Sahu

Updated: 06 Jan 2020, 11:27 AM IST

छिंदवाड़ा/ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है। इसकी वजह जीवन शैली और खानपान में परिवर्तन होता है तथा समय रहते जांच और उपचार नहीं कराने पर गर्भ में पल रहे शिशु को जन्म से डायबिटीज होने का खतरा बन जाता है। इस समस्या के निदान के लिए महिलाओं को गर्भधारण के पहले ही दिन जेस्टेशनल डायबिटीज मेलाइट्स (जीडीएम) परीक्षण कराना चाहिए। बताया जाता है कि गर्भवती की यह जांच दो बार होती है।

मास्टर टे्रनर मीना धुर्वे ने बताया कि जीडीएम वह अवस्था है, जिसमें पहली बार गर्भावस्था में खून में बढ़ी हुई शुगर का पता चलता है। गर्भावस्था में हार्मोन व शारीरिक परिवर्तन की वजह से शरीर शुगर का इस्तेमाल सामान्य रूप से नहीं कर पाता है, जिससे खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है तथा जच्चा-बच्चा के लिए हानिकारक हो सकता है। मास्टर टे्रनर धुर्वे ने बताया कि जीडीएम पॉजिटिव आने पर गर्भवती को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, जिससे शिशु को डायबिटीज होने से बचाया जा सकता है।

देश में स्थिति -


विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में दस गर्भवती में से एक डायबिटीज होती है, जिनमें से 90 प्रतिशत जीडीएम होती है। भारत के विभिन्न भागों में 100 महिलाओं में से 4 से 21 जीडीएम से प्रभावित होती है। बताया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा शहरी क्षेत्र में जीडीएम के प्रकरण सामने आते है, जो कि मां और नवजात के लिए खतरा साबित होता है।

इनकी खतरों की बढ़ जाती है आशंका -


1. जीडीएम पॉजिटिव गर्भवतियों को उनके गर्भ में पल रहे शिशु के सामान्य से बड़ा होने का जोखिम रहता है।

2. बड़े शिशु के कारण बाधित प्रसव (ऑब्सट्रक्टेड लेबर) या वैक्यूम, फोरसेप्स के द्वारा सहायता प्रदान प्रसव (एसिस्टिड डिलिवरी) और तीसरा या चौथे डिगरी का पैरीनियल फटाव।

3. पॉजिटिव गर्भवतियों में प्रीएक्लैम्प्सिया हो सकते है या डिलिवरी के बाद अधिक खून जा सकता है।
4. शिशुओं में जन्म के समय चोट और जन्म के बाद मेटाबॉलिक समस्या होने का खतरा होता है।

5. शिशुओं को बचपन में मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और बाद में हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

डायबिटीज या खून में शुगर बढऩे के लक्षण और पहचान -

अधिक पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, अधिक भूख लगना, घाव देरी से भरना आदि शामिल है।

Dinesh Sahu
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