health: समाज में इस रोग को लेकर हैं भ्रांतियां, जानें वजह

health: समाज में इस रोग को लेकर हैं भ्रांतियां, जानें वजह
health: समाज में इस रोग को लेकर हैं भ्रांतियां, जानें वजह

Dinesh Sahu | Updated: 11 Oct 2019, 12:26:51 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित हुए विविध कार्यक्रम

छिंदवाड़ा/ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर गुरुवार को जिला अस्पताल की ट्रामा यूनिट में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान करीब 25 मानसिक रोगियों का आवश्यक उपचार एवं दवा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम की शुरुआत में सिविल सर्जन डॉ. पी. गोगिया, आरएमओ डॉ. सुशील दुबे, नोडल अधिकारी डॉ. एमपी यादव सहित अन्य स्टाफ मौजूद था। इस अवसर पर छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. तुषार ताल्हन ने बताया कि समाज में भ्रम है कि मानसिक रोग विचित्र अथवा कलंक है।

यह रोग किसी भी व्यक्ति को हो सकता है तथा इस रोग का उपचार भी सम्भव है। लेकिन समय पर मरीज को उचित उपचार दिया जाना आवश्यक है। क्लीनिकल साइक्लोलॉजिस्ट डॉ. वीबी वर्मा ने बताया कि अनावश्यक तनाव, अनींद्रा, अकेलापन सहित अन्य वजह मानसिक रोग का कारण बन सकती है।

इस वजह से लोगों को संयम बरतने की आवश्यकता है। डॉ. ताल्हन ने सुझाव दिए कि मनो रोगियों से अनुचित व्यवहार न कर उनका उत्साह बढ़ाना चाहिए। ऐसे रोगियों का उपचार काफी दिन चलता है, जिसके कारण बिना डॉक्टर की सलाह से दवा बंद नहीं करनी चाहिए। शारीरिक रोगों की तरह मानसिक रोगों का भी उचित ख्याल रखना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वेक्षण 2001 के अनुसार देश में कई तरह के मानसिक रोगी है, जिन्हें उचित और समय पर उपचार मिलने पर ठीक किया जा सकता है। हालांकि जागरूकता के अभाव में एक तिहाई मरीज ही इलाज कराते है।

फैक्ट फाइल -
1. भारत में मानसिक रोगियों की संख्या करीब 30 करोड़ है।

2. स्किजोफ्रिनिया रोगियों की संख्या करीब एक करोड़ है।
3. अवसाद या डिप्रेशन वाले मरीजों की संख्या 10 करोड़ है।

4. एंग्जायटी डिसआर्डर के रोगी करीब पांच करोड़ है।
5. आब्सेसिव कम्पलसिव के रोगी एक करोड़ है।

6. विभिन्न प्रकार के नशे में लत रोगी पांच करोड़ है।
7. आत्मघाती प्रवृत्ति या आत्म हत्या के शिकार करीब 6 करोड़ है।

यह है लक्षण -

उदासी एवं रूलाई आना, घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ाहट, गुस्सा आना, नींद एवं भूख में बदलाव, पारिवारिक वातावरण से दूर रहना, अंगूठा चूसना, अप्राकृतिक कृत्य करना, ताकत में कमी या थकान आना आदि शामिल है।

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