Higher education: वर्षों बाद मिली थी सौगात, एक साल में ही दम तोडऩे लगा यह विश्वविद्यालय, सामने आई बड़ी वजह

विश्वविद्यालय अपनी योजनाओं पर तीव्र गति से काम नहीं कर पा रहा है।

By: ashish mishra

Published: 21 Nov 2020, 12:53 PM IST


छिंदवाड़ा. महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर की तरह ही छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय संबद्ध कॉलेजों के परीक्षा संचालन तक ही सीमित रह गया है। नवीन स्थापित छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय एक वर्ष में ही संसाधनों के अभाव में दम तोडऩे लगा है। इसकी वजह है बजट की कमी। शासन की उपेक्षा की वजह से यह विश्वविद्यालय अपनी योजनाओं पर तीव्र गति से काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में जिले को वर्ष 2019 में छिंदवाड़ा विवि की सौगात मिलने के बावजूद बेहतर शिक्षा का सपना अब भी अधूरा है। शुरुआत में विवि के खुलने के बाद प्रक्रिया थोड़ी ठीक रही, इसके बाद विभाग ने विवि को उपेक्षित कर दिया। बजट के अभाव में विश्वविद्यालय के बिल्डिंग का कार्य भी अभी शुरु नहीं हो पाया। वहीं दूसरी तरफ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नवीन स्थापित छिंदवाड़ा विवि को प्रर्याप्त बजट अनुदान भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में विवि को अधिकारी, कर्मचारी के वेतन भत्ते एवं बिजली, पानी सहित अन्य सामान्य खर्च के लिए विश्वविद्यालय लोकल फंड का सहारा लेना पड़ रहा है। दरअसल वर्ष 2019 में जब छिंदवाड़ा विवि खोला गया तो उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय को प्रारंभिक खर्च के लिए उच्च शिक्षा अनुदान कोष से एक करोड़ रुपए दिए थे। इसके बाद वर्ष 2020 में विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग से पांच करोड़ रुपए की बजट अनुदान की डिमांड की, लेकिन विभाग ने महज दो करोड़ रुपए ही स्वीकृत किए। इसमें भी विभाग ने प्रारंभ में उच्च शिक्षा अनुदान कोष से दिए गए एक करोड़ रुपए काट लिए और छिंदवाड़ा विवि को एक करोड़ रुपए जारी किए। यह पैसा विवि को अक्टूबर 2020 में मिला। विवि ने उच्च शिक्षा विभाग को एक करोड़ रुपए बाद में काटने के लिए पत्र लिखा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पैसे की कमी के कारण विवि को 40 लाख रुपए विवि लोकल फंड से लेना पड़ा। विश्वविद्यालय का कहना है कि हमने दो करोड़ रुपए और बजट की डिमांड उच्च शिक्षा विभाग से की है, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला है।

छह साल से चार कमरे में संचालित हो रहा छत्रसाल विवि
छतरपुर में वर्ष 2014 में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय शासकीय स्वशासी महाराजा कॉलेज के चार कमरों खोला गया। इस विवि से सागर, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और दमोह जिले के 182 कॉलेज संबद्ध किए गए, लेकिन 6 साल बीतने के बावजूद विवि को न स्थाई भवन मिला और न ही सुविधाएं। बेहतर शिक्षा व व्यवस्था के सूचारू संचालन के लिए बजट की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। छह साल बाद भी विश्वविद्यालय महज कॉलेजों के परीक्षा संचालन का कार्य कर रहा है।


यह होता फायदा
अगर समय से छिंदवाड़ा विवि बिल्डिंग बनकर तैयार हो जाती तो विवि का शिक्षण विभाग शुरु हो जाता। फैकल्टी का रिक्रूटमेंट हो जाता। 12बी के तहत रूसा और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से ग्रांट भी मिलने लगती। विवि ऐसे कोर्सेज शुरु कर सकता था जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते। इसके अलावा विवि में अधिक से अधिक शोध होते तो अधिक से अधिक पेटेंट होते। इससे विवि के कई रिसर्च संस्था से पारस्परिक सहयोग हो जाता और विश्वविद्यालय को आय के स्त्रोत जनरेट होते। इससे संस्थाओं की राष्ट्रीय रैकिंग में विवि को स्थान मिलता। नई शिक्षा नीति का विद्यार्थियों को अधिक से अधिक लाभ मिलता।


इनका कहना है...
बजट अनुदान के लिए शासन ने पत्राचार किया जा रहा है। दो करोड़ रुपए की डिमांड की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही बजट जारी हो जाएगा।
डॉ. राजेन्द्र मिश्र, कुलसचिव, छिंदवाड़ा विवि

ashish mishra Desk
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