Higher education: कॉलेज में दाखिले के नए नियम से असमंजस, छात्रों को होगी दिक्कत

शासकीय कॉलेजों में प्रवेश को लेकर गाइडलाइन जारी की है।

By: ashish mishra

Published: 03 Aug 2020, 01:11 PM IST


छिंदवाड़ा. शासकीय कॉलेजों में बीते वर्ष स्नातक प्रथम वर्ष के किसी पाठ्यक्रम में 25 से कम विद्यार्थियों की संख्या है तो सत्र 2020-21 में उस पाठ्यक्रम में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने बीते दिनों शासकीय कॉलेजों में प्रवेश को लेकर गाइडलाइन जारी की है। जिसमें कहा गया है कि सत्र 2020-21 से शासकीय कॉलेजों के स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में यदि संसाधनों में कमी है या फिर कोई कठिनाई आ रही है तो प्रवेश नियम में बदलाव किया जाएगा। इसके अंतर्गत सत्र 2019-20 में स्नातक प्रथम वर्ष में यदि किसी पाठ्यक्रम में छात्रों का प्रवेश 25 या अधिक संख्या में है तो उक्त पाठ्यक्रम में सत्र 2020-21 में प्रवेश दिया जाएगा। 24 या फिर 24 से कम प्रवेशित संख्या वाले पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए भी प्रवेश को लेकर निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कहा गया है कि अगर सत्र 2019-20 में स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में यदि किसी विषय में प्रवेश 10 या अधिक संख्या में है तभी उक्त विषय में सत्र 2020-21 में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। 9 या 9 से कम प्रवेशित संख्या वाले विषय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं जाएगी।


बरघाट कॉलेज में बंद हो जाएगा पाठ्यक्रम
छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय से संबद्ध सिवनी जिले के शासकीय कॉलेज, बरघाट में बीते वर्ष मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफार्मेशन साइंस(एमलीव) पाठ्यक्रम में 7 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। वहीं इस कॉलेज में बीते वर्ष बीलीव पाठ्यक्रम में 24 विद्यार्थियों का दाखिला हुआ था। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश को लेकर जारी किए गए गाइडलाइन के अनुसार इस वर्ष इन दोनों ही पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पाएगा। बीलीव पाठ्यक्रम की पढ़ाई के बाद एमलीव करने के लिए विद्यार्थियों को जबलपुर रुख करना पड़ेगा। गौरतलब है कि छिंदवाड़ा विवि से संबद्ध छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट में से केवल सिवनी जिले में ही एमलीव एवं बीलीव पाठ्यक्रम संचालित है।

इनका कहना है...
उच्च शिक्षा विभाग ने दाखिले को लेकर गाइडलाइन जारी की है। विद्यार्थियों के हित को देखते हुए विभाग के उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और नियम में बदलाव का निवेदन किया जाएगा।

डॉ. राजेन्द्र मिश्र, कुलसचिव, छिंदवाड़ा विवि

ashish mishra Desk
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