Hindi diwas: प्राध्यापकों ने हिंदी भाषा को लेकर कही यह बात, पढ़ें पूरी खबर

उनका कहना था कि अंग्रेजी अट्रैक्टिव लगती है।

By: ashish mishra

Published: 14 Sep 2021, 12:17 PM IST


छिंदवाड़ा. शहर के किसी भी मार्ग पर चले जाइए अधिकतर दुकानों के नाम अंग्रेजी में ही लिखे हुए मिलेंगे। सवाल यह उठता है कि हिंदी हमारी मातृभाषा होते हुए भी आज अंग्रेजी क्यों महत्वपूर्ण होती जा रही है? इस सवाल का जवाब खोजने जब दुकानों पर पहुंचे तो उनका कहना था कि अंग्रेजी अट्रैक्टिव लगती है। बदलते समय के साथ स्कूल हो या कॉलेज हर जगह हिन्दी से ज्यादा अंग्रेजी को ही महत्व दिया जा रहा है।सच्चाई तो यह है कि अंग्रेजी भाषा समाज के लिए स्टेटस सिंबल बन गई है। जबकि हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि अधिसंख्य भारतीयों की जीवन शैली है। संवाद में मधुरता और अपनापन स्थापित करने के लिए प्रभावी माध्यम है। यही वजह है कि अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, विधि और अंग्रेजी जैसे विषयों को पढ़ाने वाले कई शिक्षक न सिर्फ विद्यार्थियों से हिंदी को मान देने का आव्हान करते है, बल्कि खुद भी विशेष लेखन से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे शिक्षकों का कहना है कि हम किसी भी विषय के शिक्षक हो, लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमें अभिमान है। हमें हिंदी पर गर्व करना चाहिए। हिन्दी भाषा हमारे कानों में पड़ते ही रसमय संगीत की अनुभूति देती है। इसका उच्चारण, लिपि, लयबद्धता इसे संसार की सर्वोत्तम भाषा का स्थान प्रदान करती है। सोशल मीडिया ने आज इस भाषा के प्रचार-प्रसार और अभिव्यक्ति के लिए मंच दिया है। आने वाले समय में हिंदी अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगी। हिंदी भारत के विस्तृत क्षेत्र में बोली जानेवाली भाषा है। यह सरल तथा सुबोध है। इसकी लिपि भी इतनी बोधगम्य है कि थोड़े अभ्यास से ही समझ में आ जाती है। विश्व के लगभग सौ देशों में जीवन के विविध स्थानों मे हिंदी भाषा का प्रयोग होता है। हमारी मातृभाषा से हमारी पहचान है। अन्य भाषाओं की तुलना में आज भी हिंदी भाषा का अपना अद्वितीय स्थान है।

इनका कहना है...
हिन्दी भाषा की अपनी शान है। इसका स्थान अंग्रेजी कभी नहीं ले सकती।
अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देने का यह नतीजा है कि लोग आम बोलचाल की अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह बहुत ज्यादा नहीं है। व्यावसायिकता के कारण अंग्रेजी का महत्व बढ़ता जा रहा है। हिंदी भाषा का अंतरराष्ट्रीकरण ज्यादा हो रहा है। प्रवासी भारतीयों का रूझान हिंदी की तरफ बढ़ा है।
डॉ. विजय कलमधार, प्राध्यापक, हिंदी
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हिन्दी कभी विलुप्त नहीं हो सकती। तमाम बहुउद्देशीय कंपनियां अपने उत्पाद का विज्ञापन हिंदी में करती हैं। समय के साथ हिंदी का क्षेत्र बढ़ा है। हिंदी भाषा को दूसरे भाषा को पचाने की क्षमता है, इसलिए यह समृद्ध हो रही है। नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा को और मजबूती मिलेगी। हिंदी का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

प्रो. सीताराम शर्मा, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग

ashish mishra Desk
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