Corona: पितरों के मोक्ष में कोरोना कैसे बना बाधा, पढ़ें यह खबर

हिन्दू कर्मकांड के अनुसार पितरों की आत्मा शांति के लिए उन्हें गयाजी में स्नान कराने के साथ ही पिंडदान करना आवश्यक होता है।

By: babanrao pathe

Published: 05 Sep 2020, 09:37 AM IST

छिंदवाड़ा. इस साल कोविड-19 के कारण ट्रेनों और बसों के पहिए थमे हुए हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग गयाजी नहीं जा पा रहे हैं। दो सितम्बर से शुरू हुए पितृपक्ष तर्पण के लिए जलाश्यों में भी एकत्रित नहीं होने की अपील प्रशासन की तरफ से लगातार की जा रही है। इन्हीं सब कारणों के चलते हजारों पितरों को मोक्ष नहीं मिल पा रहा है।

हिन्दू कर्मकांड के अनुसार पितरों की आत्मा शांति के लिए उन्हें गयाजी में स्नान कराने के साथ ही पिंडदान करना आवश्यक होता है। इसी कारण से पितृपक्ष में हर साल जिले से हजारों की संख्या में लोग अपने-अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए गयाजी जाते हैं। इस साल पितरों के मोक्ष में भी कोराना का साया पड़ गया है। कोरोना संक्रमण के कारण अपने-अपने पितरों को गयाजी लेकर जाने की चाह रखने वाले लोग इस साल ट्रेन और बसों के नहीं चलने के कारण गयाजी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे हजारों पितर इस साल मोक्ष के लिए इंतजार करते रह जाएंगे। पितृपक्ष में हर साल जिले से बड़ी संख्या हिन्दू धर्म के लोग पिंड लेकर गयाजी जाते थे, जहां पिड़दान और श्रद्धा आदि करके उन्हें तर्पण के साथ मोक्ष दिलाया जाता है। जिन्हें गयाजी जाना होता है वे काफी दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। रेलवे की टिकटें भी महीनों पहले ही बुक करा लेते थे। इसी तरह कुछ बसें भी बुक होकर जिले से जाती थी। बसों की हड़ताल चल रही है इसी तरह पूरी तरह से ट्रेनें भी चलनी शुरू नहीं हो पाई है। पितरों के मोक्ष के लिए इंतजार करना पड़ेगा। पूरे एक पखवाड़े तक चलने वाले पितृपक्ष की शुरुआत 2 सितम्बर से हो चुकी है। पितृपक्ष में श्राद्ध और पूजन के चलते पंडितों की पूछ परख बढ़ जाती है। पितृपक्ष का समापन 17 सितम्बर को पितृ मोक्ष अमावस्या के साथ होगा। इसके बाद से इस साल मलमास और अधिमास शुरू हो जाएगा। अधिमास में शुभ कार्यों पर प्रतिबन्ध रहेगा और एक माह तक कोई शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे।

पितरों का नहीं कर पाए तर्पण
परम्परागत तरीके से मोक्षअमावस्या से शारदेय नवरात्र शुरू हो जाता था। लेकिन इस बार मलमास अधिमास होने के कारण करीब एक माह बाद 17 अक्टूबर से शारदेय नवरात्र शुरू होगा। समापन 26 अक्टूबर को होगा। अधिमास होने के कारण दीपावली इस बार आधे नवम्बर माह में पड़ रही है। त्योहारों में करीब एक माह का अंतर आ रहा है। इसके कारण उम्मीद जताई जा रही है कि दीपावली में कड़ाके की ठण्ड महसूस हो सकती है। पंडित पंकज शास्त्री का कहना है कि आस-पास की बहती हुई नदी में और घर में भी गंगा जल के साथ तर्पण किया जा सकता है। गयाजी और यहां किए गए तर्पण का भी एक जैसा फल मिलता है।

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babanrao pathe Reporting
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