scriptIllegal business of wood swallowing saw mills | सॉ मिलों को निगल रहा लकड़ी का अवैध कारोबार | Patrika News

सॉ मिलों को निगल रहा लकड़ी का अवैध कारोबार

अवैध कारोबारियों का हस्तक्षेप आर्थिक तौर पर बना रहा कमजोर, वैध कारोबारियों को मिलने वाला मुनाफा पहुंच रहा तस्करों तक, लकड़ी के कई विकल्प होने के बाद भी जरूरत बरकरार

छिंदवाड़ा

Published: June 09, 2022 09:15:19 am

प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा। सॉ मिल दशकों पहले गुलजार हुआ करते थे। भवन निर्माण, फर्नीचर, होटल इन पर निर्भर थे। घर की कई जरूरतें यहां से पूरी हुआ करती थीं। सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलता था। अब स्थिति अलग है। जिले की कई सॉ मिलें बंद हो चुकी हैं, जो संचालित हैं वे बंद होने की कगार पर हैं।
प्राथमिक तौर इसकी वजह तो यही मानी जाएगी कि अब लकड़ी का उपयोग कम हो गया, लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं मानी जा सकती। आधुनिकीकरण के चलते लकड़ी के कई विकल्प हमारे सामने मौजूद हैं, लेकिन लकड़ी की मांग बरकरार है।
दरअसल, लकड़ी के अवैध व्यापार का बढ़ता हस्तक्षेप इन सॉ मिलों को आर्थिक तौर पर तोड़ रहा है। अवैध कारोबारियों की दखल वैध कारोबारियों के लिए चिंता को विषय बनी हुई है।
वैध कारोबार में मुनाफा इतना कम हो गया है कि संचालक इससे दूरी बनाने लगे हैं। कुछ तो महंगी मशीनों को बेच भी चुके हैं।
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अंचल में पनपता अवैध कारोबार
जिले के बिछुआ, मोहखेड़ जैसे क्षेत्र जहां वन बहुतायत में हैं वहां अवैध कटाई सर्वाधिक होती है। कटाई के बाद लकड़ी स्थानीय आरा मशीनों तक पहुंचा दी जाती है, जबकि जिला मुख्यालय के सॉ मिल पर सम्बंधित विभाग की सीधी नजर होती है। मुख्यालय के लाइसेंसधारी व्यापारी सरकारी डिपो से लकड़ी की नीलामी में शामिल होकर खरीदी करते हैं, लेकिन अंचल में विभाग की सक्रियता कम रहती है। इसी वजह से वहां की आरा मशीनों में अवैध स्टॉक को खपाना आसान होता है।
लाइसेंसधारी व्यापारी बनाम गैर लाइसेंसधारी कारोबारी
एक लकड़ी टाल संचालक को व्यापार के लिए वन विभाग से लाइसेंस लेना होता है। सरकारी डिपो से ही नीलामी के दौरान लकड़ी की खरीदी करनी होती है, जबकि इसके विपरीत गैर-लाइसेंसधारी अवैध तरीके से खरीदी कर लेते हैं और लोगों को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर बेच देते हैं। ऐसे लोगों की सक्रियता से जो लाभ वैध सॉ मिल संचालकों को मिलना चाहिए वह अवैध कारोबारियों तक पहुंचता है।
स्टॉक और आपूर्ति की कभी नहीं होती जांच
अंचल की सॉ मिलों में कभी भी स्टॉक और यहां से की जाने वाली आपूर्ति की जांच नहीं होती। वहां के ज्यादातर लकड़ी टाल जब सरकारी खरीदी में शामिल होते ही नहीं तो उनके पास आपूर्ति के लिए स्टॉक कहां से आता है। आमतौर पर अवैध स्टॉक को छिपाने के लिए कभी-कभी कभार सरकारी डिपो से खरीदी कर ली जाती है। यदि ऐसे लकड़ी टालों की नियमित जांच की व्यवस्था बनाई जाती है तो वैध तरीकों से संचालित हो रहीं सॉ मिलों के लिए यह फायदेमंद होगा।
एक साल में 16 कार्रवाई
जिलेभर में लकड़ी चोरी और तस्करी के एक साल में 16 केस बनाए गए हैं। इमारती लकड़ी जब्त कर डिपो पहुंचाई गई है। शिकायत होने पर उडऩदस्ता दल सीसीएस के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई के लिए पहुंचता है।
- देवेंद्र सोनी, उडऩदस्ता प्रभारी छिंदवाड़ा वन वृत
हमारे एसोसिएशन ने तय किया है कि यदि कोई सदस्य लकड़ी की अवैध खरीदी-बिक्री या अन्य गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा। इसके लिए एसोसिएशन की कोई जवाबदारी नहीं होगी। एसोसिएशन ऐसे कृत्य को बिल्कुल भी प्रोत्साहन नहीं देता है।
तिलकराज शर्मा, अध्यक्ष, सॉ मिल ऑनर्स एंड टिम्बर मर्चेंट्स एसोसिएशन

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