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Illegal colony: फैल रहा जाल, अधिकारी असमंजस में, रहवासी परेशान

प्रशासनिक शिथिलता का फायदा उठा रहे अवैध कॉलोनाइजर

छिंदवाड़ा

Published: December 24, 2021 10:30:47 am

प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा। जिले में जिस तेजी से अवैध कॉलोनियों का जाल फैल रहा है, उस तेजी से कार्रवाई नहीं हो रही। यही वजह है कि प्रशासनिक शिथिलता और धीमी कार्यशैली का फायदा अवैध कॉलोनाइजर उठा रहे हैं और धड़ल्ले से बिना अनुमति के ग्रीन लैंड पर प्लॉटिंग कर रहे हैं।
शहरी क्षेत्र के बढऩे और विकास के चलते शहर के आसपास ही ये कॉलोनियां तैयार हो रहीं हैं। कुछ कॉलोनियों का निर्माण पूरा होने की कगार पर है तो कुछ का काम चल रहा है। अधिकारियों की मानें तो निगम क्षेत्र में करीब 85 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की गई हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ दो के खिलाफ ही एफआइआर हो पाई है जबकि 19 पुराने मामले एफआइआर के लिए लम्बित हैं। वहीं तीन अन्य कॉलोनाइजर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी है।
दरसअल अवैध कॉलोनियोंं को वैध करने का रास्ता राजनीतिक स्तर पर साफ हो गया, लेकिन नौ माह बाद भी गाइडलाइन न मिलने की वजह से प्रशासन भी असमंजस में है। इससे न तो अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया शुरू हो पाई न ही कार्रवाई आगे बढ़ी।
अब इस लेटलतीफी का खमियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जो अवैध कॉलोनाइजर के चंगुल में फंसकर अपना आशियाना ऐसी जगह बना चुके हैं जहां न
तो वैध तरीके से बिजली मिल रही है और न ही कॉलोनियों में सडक़ है न नाली।

Illegal colony
Illegal colony

नगर पालिका विधि (संशोधन) विधेयक में यह है शामिल

- सरकार ने तय सीमा से 30 फीसदी अधिक आवास निर्माण को शुल्क लेकर नियमित करने का प्रावधान किया है। बिना अनुमति कॉलोनी बनाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें कम से कम तीन वर्ष की जेल और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा। जिस अधिकारी के क्षेत्र में अवैध कॉलोनी बनेगी उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही पर अधिकारी जवाबदेह होंगे। ऐसा करने वाले व्यक्ति को कम से कम तीन साल की सजा होगी। कॉलोनाइजर के रूप में पंजीयन किया जाएगा पर इससे शासकीय निर्माण इकाइयों को मुक्त रखा जाएगा। अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए कॉलोनाइजर को नक्शा पास कराने से लेकर सभी प्रकार की अनुमति लेनी होगी।
- संशोधन के बाद लागू प्रावधान में अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने आवास के अवैध हिस्से को शुल्क देकर वैध करा सकेंगे। कॉलोनाइजर को कॉलोनी में सभी विकास कार्य करके देने होंगे। ऐसा न करने पर उसकी बंधक सम्पत्ति को जब्त कर विकास कार्य कराए जाएंगे। वहीं अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

प्रशासन का दावा और हकीकत
दावा: अवैध कॉलोनियों का नाम समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाएगा ताकि लोग जागरूक हों और ऐसे मकान या प्लॉट ना खरीदें।
हकीकत: प्रकाशन के लिए नगरीय प्रशासन विभाग पर निर्भर
दावा: सप्ताह में एक दिन अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई की जाएगी
हकीकत: सप्ताह के एक दिन तो क्या महीने में एक बार भी कार्रवाई नहीं होती।


अब तक की कार्रवाई
19 कॉलोनाइजरों के विरुद्ध एफआइआर के लिए देहात थाने में निगम द्वारा सूची सौंपी जा चुकी है।
कुकड़ा और लोनिया करबल में अवैध कॉलोनी काटने वाले दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
चंदनगांव के एक कॉलोनाइजर की कोतवाली में तो नरेंद्र माहोरे की कुंड़ीपुरा में एफआइआर हो चुकी है।
(नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार)

इनका कहना है
शासन के आदेश पर ही अवैध कॉलोनाइजरों के नाम समय-समय पर प्रकाशित करवाए जाते रहे हैं। पहले से ही कॉलोनाइजरों पर एफआइआर के लिए सूची दी जा चुकी है। लगातार कार्रवाई करते हुए और प्रकरण बनाए जा रहे हैं। दस्तावेज पूरे होते ही सम्बंधित थाने में एफआइआर के लिए भेजा जाता है।
हिमांशु सिंह, आयुक्त नगर निगम

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