यलो जोन में पहुंचा शहर, नहीं रहे अलर्ट तो पहुंच जाएंगे डेंजर जोन में

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चौथे माह की रिपोर्ट में खुलासा

By: prabha shankar

Published: 24 May 2018, 11:24 AM IST

छिंदवाड़ा . सडक़ पर उड़ती धूल के गुबार के चलते छिंदवाड़ा शहर ग्रीन जोन से बाहर आ गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक में फिसलने पर इसे यलो जोन अर्थात खतरनाक श्रेणी की चेतावनी वाले नगरों में शामिल किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चौथे माह की रिपोर्ट में इस पर्यावरण आधारित स्थिति का खुलासा हुआ है। बोर्ड ने चेतावनी दी कि धूल से बचाव के लिए सडक़ किनारे पैवर्स लगाने और पौधरोपण करने पर ही शहर वापस ग्रीन जोन में वापस आ पाएगा। इसके लिए तुरंत प्रयास करने की जरूरत है।

बोर्ड के मुताबिक जनवरी से मार्च तक छिंदवाड़ा शहर अपनी आबोहवा और पर्यावरण के चलते ग्रीन जोन यानि संतोषजनक श्रेणी में था, जिसका एयर क्वालिटी इंडेक्स इन तीन माह में 79.58, 77.49 और 78.52 था। अप्रैल में यह करीब 50 फीसदी बढक़र 113.27 मानक पीएम 10 पहुंच गया है। बोर्ड के अधिकारी मान रहे हैं कि साल के पहले तीन माह में ठंड का प्रभाव होने पर सडक़ पर धूल का स्तर कम रहा। जैसे ही अप्रैल में तापमान 40 डिग्री पहुंचा, वैसे ही हवाओं के प्रभाव से सडक़ों पर धूल भरे कणों की मात्रा बढ़ी। सडक़ किनारे धूल के कण वाहनों के पहिए से उठे और गुबार बन गए। इसे हायर वाल्यूम सेम्पलर मशीन ने नोट कर लिया।

साफ है कि सडक़ों पर दोपहिया और चौपहिया वाहनों का दबाव है। धूल और धुएं का असर धीरे-धीरे शहर की आबोहवा को खराब कर रहा है। इसके चलते शहर वायु प्रदूषण में लिमिट से बाहर निकलकर चेतावनी स्तर पर पहुंच गया है। भविष्य को सुधारने के लिए जरूरी उपाय करने होंगे।

एयर क्वालिटी इंडेक्स रिपोर्ट में छिंदवाड़ा की स्थिति चौथे माह बिगड़ गई है। सडक़ों पर ट्रैफिक और आबादी का दबाव पहले से ही है। धूल भरे गुबार को कंट्रोल में करने के लिए सडक़ किनारे पैवर्स और पौधरोपण तेजी से कराना होगा। अन्यथा पर्यावरण को अधिक दिन सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा।
सुनील श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड छिंदवाड़ा

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