खतरनाक है कोरोना संक्रमण का बढऩा...नया स्टे्रन शोध का विषय, जानें वजह

- अभी पुराने वायरस पर नियंत्रण के लिए हैं वैक्सीन, सिम्स के डीन डॉ. रामटेके ने जताई चिंता

By: Dinesh Sahu

Updated: 01 Mar 2021, 06:35 PM IST

छिंदवाड़ा/ कोरोना संक्रमण के अचानक बढ़ी संख्या में नए मामले सामने आने लगे है, जो कि चिंता का विषय है। वायरस पुरानी प्रकृति का हुआ तो उस पर नियंत्रण पाने के लिए वैक्सीन हैं, पर नया स्टे्रन बनकर सामने आया तो समस्याएं बढ़ सकती हैं तथा वैज्ञानिकों को फिर से शोध कर वैक्सीन तैयार करनी पड़ेगी। हालांकि अभी संक्रमण के संदर्भ में स्पष्ट कहना उचित नहीं होगा।

यह कहना है छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के डीन डॉ. जीबी रामटेके का, उन्होंने बताया कि पहले डोज के 28 दिन बाद दूसरा डोज लेने के बाद भी 15 दिन इंतजार करना होता है। इसके बाद ही शरीर में एंटीबॉडिज निर्मित होती है। इससे सम्बंधित व्यक्ति जीवन भर के लिए सुरक्षित नहीं हो जाता है, कुछ महीनों बाद लोगों को शरीर में मौजूद एंटीबॉडिज दर की जांच कराना चाहिए। इससे दोबारा वैक्सीन लगाने की जरूरत है या नहीं स्पष्ट हो सकेगा।


नया स्टे्रन की संक्रमण क्षमता अधिक -


कोरोना का नया स्टे्रन पुराने वायरस की अपेक्षा अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है, पर इससे संक्रमित मरीजों की मौत दर में कोई अंतर नहीं देखा गया हैं। छिंदवाड़ा के आसपास राज्य या जिलों में सामने आ रहे मामलों में वायरस किस प्रवृत्ति का है, यह शोध का विषय है।


सावधानी बरतना बहुत आवश्यक -


माह जनवरी-फरवरी 2020 में कोरोना वायरस के प्रभाव देखने में आने लगे थे, जिसके बाद प्रशासन और चिकित्सा अमला काफी सतर्क रहा। इससे छिंदवाड़ा में संक्रमण की दर काफी कम देखने को मिली। आने वाले समय में घातक स्थिति निर्मित न हो, जिसके लिए सभी को समझने और प्रोटोकाल का पालन करना बहुत जरूरी हैं।

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