बढ़ा जलापूर्ति का बोझ, गर्मी में हो सकती है दिक्कत

हाल ही में नपा द्वारा दिए गए नए 800 नल कनेक्शन से जल आपूर्ति का बोझ और बढ़ गया है। हालांकि जिला प्रशासन ने नगरीय क्षेत्र में जल आपूर्ति के लिए तीन जलाशयों का पानी सुरक्षित रखने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए है।

छिंदवाड़ा/पांढुर्ना. गर्मी के तेवर दिन-ब-दिन तेज होते जा रहे है। जिससे पेयजल स्त्रोंतो पर असर दिखाई देने लगा है। शहर की पेयजल आपूर्ति पुरी तरह से जुनेवानी जलाशय और नपा के ट्यूबवेल पर निर्भर है। दोनों ही प्रमुख स्रोतों में जलस्तर तेजी से कम होता जा रहा है। इस पर हाल ही में नपा द्वारा दिए गए नए 800 नल कनेक्शन से जल आपूर्ति का बोझ और बढ़ गया है। हालांकि जिला प्रशासन ने नगरीय क्षेत्र में जल आपूर्ति के लिए तीन जलाशयों का पानी सुरक्षित रखने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए है। इस पर आनेवाले समय में नागरिकों को भी पानी का दुरूपयोग न करने की अपील की जा रही है।
नगर पालिका से मिली जानकारी के अनुसार जुनेवानी जलाषय में मई तक का पानी बचा है। इसके अलावा वर्तमान में पेयजल आपुर्ति के लिए 32 में से 28 ट्यूबवेल की मदद ली जा रही है। चार बोर सूखें की भेंट चढ़ चुके है वहीं कई बोर रूक रूक कर पानी दे रहे है।

गर्मी में दूसरे जलाशय पर निर्भर
हर साल जूनेवानी जलाशय के सूखने के बाद दूसरे जलाशयों पर निर्भरता बढ़ जाती हैं। इस साल भी जिला प्रशासन ने नगर पालिका की मांग पर मोही, पिपलपानी और मोहखेड़ी जलाशय का पानी सुरक्षित रखने के लिए आदेश दिए है। मोही जलाशय में 20 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। इससे आज भी फसलों की सिंचाई जारी है। इसी तरह पिपलपानी में पानी की मात्रा सीमित ही है।

ठोस योजना अधर में
नगर में पेयजल आपूर्ति के लिए आज भी ठोस योजना की मांग है जो योजना मूर्त होने को है वे अधर पर है। कांग्रेस के शासन काल में स्वीकृत हुई नंदेवानी जलाशय से जूनेवानी फिल्टर प्लांट तक पानी लाने की योजना अधर में लटकी हुई है। पीएचइ विभाग भले ही अपना कार्य पूरा कर लें फिर भी जल संसाधन विभाग के द्वारा जलाशय की दिवार बंद न कर दें तो पानी आना मुमकिन नहीं दिखाई दे रहा है। इसलिए एक जलाशय की मांग तेजी से की जा रही है।

प्रतिदिन जलापूर्ति35 लाख लीटर पहुंची
नपा द्वारा यूआइडीएसएसएमटी जल आवर्धन योजना के अंतर्गत बनाई गई नई पानी की टंकियो से जलआपूर्ति शुरू होने के बाद प्रतिदिन जलापूर्ति 35 लाख लीटर पर पहुंचने की जानकारी मिली है। इससे पहले यह 25 से 28 लाख लीटर पर थी। बढ़ते नल कनेक्शन का बोझ इन टंकियों के उपयोग से कम करने के प्रयास हो रहे है।

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Sanjay Kumar Dandale
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