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Innovation: इन्हें थ्री टीचर नहीं...थ्री जीनियस कहिए जनाब

सरकारी स्कूल की कर दी कायापलट, पांच वर्षों से हर माह स्कूल पर खर्च कर रहे अपने वेतन का एक फीसद: अब डिजिटल क्लास में पढ़ते हैं आदिवासी बच्चे

छिंदवाड़ा

Updated: December 18, 2021 10:56:09 am

छिंदवाड़ा। शिक्षकों को अच्छा वेतन और पर्याप्त शासकीय राशि के आवंटन के बावजूद सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पिछड़ा हुआ माना जाता है। निजी स्कूलों के विद्यार्थी अपेक्षाकृत बेहतर ही माने जाते हैं। वजह इन दोनों श्रेणियों में मिलने वाली सुविधाओं का अंतर और वह सोच जो निजी संस्थानों को हमेशा सरकारी संस्थानों से बेहतर बताती है। इसी सोच को बदलने का बीड़ा उठाया शासकीय माध्यमिक शाला घोघरी के तीन शिक्षकों ने।

प्रभारी प्रधान पाठक अनिल कोठेकर ने अपने दो शिक्षक साथी रघुनाथ पानतावने, रामू पवार के साथ मिलकर शासकीय-निजी स्कूलों के बीच की खाई पाटने की एक मुहिम शुरू की। समय के साथ-साथ मेहनत रंग लाई। अब इनके स्कूल में ब्लैकबोर्ड की जगह प्रोजेक्टर और स्मार्ट टीवी तो किताबों की जगह लैपटॉप और टेबलेट ने ले ली है। ये तीनों शिक्षक मोहखेड़ विकासखंड के उमरानाला संकुल अंतर्गत स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल में पदस्थ हैं। इन्होंने अपने स्कूल की तस्वीर बदलने की लिए एक दिसम्बर 2016 से हर माह अपने वेतन का एक प्रतिशत नवाचार पर खर्च करने की ठान ली थी। राशि एकत्रित करते हुए इन्होंने न सिर्फ पढ़ाई का तरीका बदल दिया बल्कि अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया।

इन तीन शिक्षकों ने एकत्रित राशि से सबसे पहले स्कूल की साज-सज्जा की और फिर क्लासरूम को पूरा डिजिटल बना दिया। इस नवाचार को देखने जिलेभर के शिक्षक तो यहां आते ही हैं प्रशासनिक अधिकारी भी इस ओर आकर्षित होते हैं। डीपीसी, बीआरसी, तहसीलदार, जनपद सीइओ समेत कई अन्य अधिकारियों ने इनकी प्रशंसा की है। उनके कार्यों को देखकर विभागीय ही नहीं क्षेत्र के लोग भी उनकी सराहना कर रहे हैं।

chhindwara
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बढ़ रहा है बौद्धिक विकास
अ निल कोठेकर ने बताया कि यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है। यहां के विद्यार्थियों में अपेक्षाकृत ज्यादा जिज्ञासा है। वे पढकऱ सीखने के बजाय देखकर ज्यादा तेजी से सीख लेते हैं। डिजिटल क्लास में मिलने वाला नयापन उन्हें उत्सुक बनाता है। वे जितनी ज्यादा उत्सुकता दिखाते हैं उसी तेजी से उनकी जिज्ञासा शांत भी होती है। इसके काफी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उनका बौद्धिक विकास हो रहा है। हाल ही में इस स्कूल की छात्रा महिमा डोंगरे का चयन मींस परीक्षा में हुआ है।

बस खल रही है खेल मैदान की कमी
स्कूल में वह सभी सुविधाएं हैं जो किसी प्राइवेट स्कूल में भी मुश्किल से मिल पाती हैं। यहां कमी है तो सिर्फ एक खेल मैदान की। स्कूल भवन के सामने मैदान समतलीकरण को लेकर कई बार यहां के शिक्षकों ने अपनी मांग रखी है, लेकिन पंचायत ने इसे कभी गम्भीरता से नहीं लिया।

निजी से सरकारी स्कूल का किया रुख
मैं पहले निजी स्कूल में पढ़ा करती थी, लेकिन वहां न तो पढ़ाई अच्छे से होती और न ही पर्याप्त संसाधन थे। जबसे मैंने इस सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है काफी कुछ सीखने को मिला।
संस्कृति डोंगरे, छात्रा

स्मार्ट टीवी के माध्यम से स्कूल में पढ़ाई करने में आसानी हो रही है। इससे हमें जल्दी समझ में आ जाता है। यहां पर अनुशासन समेत अन्य गतिविधियां करवाई जाती हैं।
प्रिंस डोंगरे, छात्र

कर्तव्यों का पालन जिम्मेदारी से
किसी भी देश के लिए शिक्षक, रक्षक और चिकित्सक काफी महत्वपूर्ण अंग होते हैं। रक्षक सीमा पर रहकर देश की रक्षा करते हैं। चिकित्सक हर किसी को स्वस्थ रखने में अपना योगदान देते हैं। वहीं शिक्षक नई पीढ़ी का निर्माता होता है। इसीलिए हम शिक्षकों को अपने कर्तव्यों का पालन जिम्मेदारी से करना चाहिए। यदि अन्य स्कूलों में भी ऐसा नवाचार होने लगे तो सरकारी स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी और उनका शिक्षा का स्तर बढ़ेगा।
अनिल कोठेकर, प्रभारी प्रधान पाठक शासकीय माध्यमिक स्कूल घोघरी

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