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Inspiration: हाइटेक राजू करता है मजदूरी, लिखता है कविता, छप गई किताब

विपरित परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।

छिंदवाड़ा

Published: March 29, 2022 01:18:35 pm

छिंदवाड़ा. कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस बात को 24 वर्षीय राजू सलामे ने चरितार्थ किया है। मूलरूप से बिछुआ के सामरबोह निवासी पेशे से मजदूर राजू ने विपरित परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। जिद थी कविता लिखने की और किताब प्रकाशित करवाने की। हालांकि राजू के पास न ही पैसे थे और न ही कोई माध्यम। गरीब परिवार से संबंध रखने वाले राजू ने आधुनिक तकनीक ऑनलाइन माध्यम का सहारा लिया। काफी सर्च करने के बाद आखिरकार उनकी उम्मीद ने हकीकत का रूप ले लिया। नोशन प्रेस पब्लिकेशन, चेन्नई, इंडिया को उन्होंने अपनी कविताओं की निशुल्क किताब प्रकाशित करने के लिए रिक्वेस्ट भेजी जो स्वीकार हो गई। इसके बाद राजू ने अपनी स्वलिखित कविताएं भेजी और किताब प्रकाशित हो गई। राजू को मेल पर जब इसकी जानकारी लगी तो वह खुशी से झूम उठे। उन्होंने अपनी इस खुशी को सभी के साथ शेयर किया। राजू कहते हैं कि अभी उनकी मंजिल काफी दूर है वे कविता के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी एक अलग पहचान बनना चाहते हैं। इसके लिए वह खुब मेहनत कर रहे हैं।
Inspiration: हाइटेक राजू करता है मजदूरी, लिखता है कविता, छप गई किताब
Inspiration: हाइटेक राजू करता है मजदूरी, लिखता है कविता, छप गई किताब
दिन में मजदूरी, रात में करते हैं पढ़ाई
राजू के माता-पिता मजदूरी करते थे हालांकि अब वे बूढ़े हो चले हैं इस वजह से घर पर ही रहते हैं। राजू आठ भाई-बहन में सबसे छोटे हैं। राजू जब शासकीय स्कूल में पढ़ते थे तो वे शिक्षकों को कविता लिखते और पढ़ते देख प्रेरित हुए। इसके बाद वे खुद भी कविता लिखने लगे। धीरे-धीरे उनकी इस क्षेत्र में रुचि बढ़ते गई। हालांकि पारिवारिक हालात ठीक न होने की वजह से राजू को पढ़ाई से दूरी बनानी पड़ी और उन्होंने छिंदवाड़ा में मजदूरी करना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे जब स्थिति ठीक हुई तो उन्होंने एक बार फिर कविता लिखना शुरु कर दिया। वर्तमान मेें राजू प्राइवेट से स्नातक की पढ़ाई भी कर रहे हैं। वे दिन में मजदूरी करते हैं और रात में पढ़ाई एवं कविता लिखते हैं। राजू कहते हैं कि मुझे कम्प्यूटर का सारा काम आता है। टाइप भी कर लेता हूं। पहले मैं कियोस्क सेंटर में काम करता था, लेकिन वहां चार हजार रुपए माह ही मिलते थे, लेकिन मजदूरी करने पर अच्छी कमाई हो जाती है। राजू कहते हैं कि मेरे जीवन में जो भी घटनाएं होती है उसे मैं कविता का रूप दे देता हूं।
हाइटेक है राजू, लैपटॉप भी है पास
राजू की पारिवारिक स्थिति ने उन्हें भले ही मजदूर बना दिया हो, लेकिन वे आधुनिकता के युग में किसी से पीछे नहीं हैं। उनके पास लैपटॉल, मोबाइल है। ऑनलाइन कार्यों में वे पारंगत हैं। बस जरूरत है तो उन्हें एक मौके की। राजू कहते हैं कि अगर इच्छाशक्ति हो तो रास्ते खुद ब खुद तलाशे जा सकते हैं। मैंने अपनी किताब प्रकाशित कराकर यह बात साबित कर दी। अब मुझे एक ऐसे मंच की तलाश है जो मेरी प्रतिभा को समझे और मुझे एक मौका दे।

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