INTERVIEW: मिलिए छिंदवाड़ा कलेक्टर से, जानिए कौन सी वजह इन्हें बनाती है खास

प्रस्तुत है छिंदवाड़ा के युवा कलेक्टर सौरव कुमार सुमन से पत्रिका के बातचीत के कुछ अंश

By: prabha shankar

Published: 10 Sep 2021, 11:02 AM IST

छिंदवाड़ा। सवा साल पहले जब छिंदवाड़ा कलेक्टर के रूप में सौरव कुमार सुमन ने पदभार संभाला, तब कोरोना संक्रमण चरम पर था। उन्होंने कोरोना के बीच जिले की चुनौतियों को जिस तरह से स्वीकार कर कार्य किया है, उससे उनकी कुशाग्र प्रबंधन क्षमता का परिचय मिलता है। कोरोना की दूसरी लहर में जब पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी थी, तब छिंदवाड़ा ने प्रदेश के 14 जिलों का ेऑक्सीजन की आपूर्ति की। जिले को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर कार्य चल रहा है। खेल की उन्नत संभावनाओं की तैयारी हो चुकी है। मक्का से लेकर संतरे तक को देश ही नहीं विदेशों में नाम कमाने का मौका मिलने वाला है। कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन का कार्य जारी है। प्रस्तुत है छिंदवाड़ा के युवा कलेक्टर सौरव कुमार सुमन से पत्रिका के बातचीत के कुछ अंश -

सवाल: आपका ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है?
जवाब: ज्ञानाश्रय ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करते हुए पूरी संस्था ही खड़ी करना चाहते हैं, जहां प्रत्येक विद्यार्थी को सभी किताबें मिलें। कंप्यूटर लैब हो, ऑनलाइन लाइब्रेरी, प्रिंटर की व्यवस्था के साथ शारीरिक विकास के लिए टेबिल टेनिस आदि हो। विद्यार्थी ज्ञानाश्रय संस्था में दिनभर बिताकर कुछ हासिल कर सके। दिल्ली हाट की तरह छिंदवाड़ा हाट बाजार बनाया जाएगा, जहां आदिवासी ट्ेडिसनल प्रोडक्ट का एक मार्केट होगा। एक ब्रांडेड रेस्तरां खुलेगा। जिले में पिकनिक स्पॉट, आर्ट गैलरी के साथ स्किल डेवलपमेंट कार्य किया जाएगा। उद्योगों में ऐसी व्यवस्था होगी कि प्री सलेक्टेड बच्चे उनमें इंटर्न की तरह काम कर सकें।

सवाल: प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ सिविल की पढ़ाई का क्या उद्देश्य है।
जवाब: आज के युवा के सोचने के तरीके को उन्नत करने के लिए उन्हें कई पहलुओं से अवगत कराना जरूरी है। इसके लिए पीएससी से अच्छा कोई माध्यम नहीं है। किसी परीक्षा की तैयारी को सामने रखकर जब हम इतिहास, भूगोल, संविधान, अर्थशास़्त्र के साथ समाज का अध्ययन करते हैं तो भं्रातियां दूर होती हैं। जिस क्षेत्र में काम करना है उसकी जानकारी तो मिलती ही है साथ ही प्रशासन को लेकर नकारात्मक धारणाओं में भी बदलाव आता है।

सवाल: स्कूल शिक्षा प्रणाली और एनसीआरटी की पुस्तकों को लेकर क्या दृष्टिकोण है।
जवाब: शिक्षा राज्य का विषय है, संविधान के अनुसार प्रत्येक राज्य अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए स्वतंत्र हैं। विविधाताओं के अनुसार राज्य के बोर्ड हैं, उनकी अपनी किताबें हैं। सीबीएसई, एनसीआरटी का अपना अलग पाठ्यक्रम हैं। चुनने के विकल्प हैं लोग अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार शिक्षा व्यवस्था का चुनाव कर सकते हैं। सरकारी स्कूल भी बेहतर शिक्षा दे रहें है। वे खुद भी सरकारी स्कूल से पढ़ाई किए हैं।

सवाल: खेल विधाओं के लिए क्या योजना बनाई गई है।
जवाब: खेलों के प्रसार व विकास के लिए ओलंपिक संघ से संपर्क किया गया है, इसके लिए चुनाव आदि से लेकर सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। खामियों को दूर करते हुए सुधार कर ओलंपिक संघ की अपनी आय की व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी। जिससे खिलाडिय़ों को खेल सामग्री की कमी न हो, आने वाला समय माकूल रहा तो खेल महोत्सव जैसे बड़े आयोजन भी करवाएं जा सकते हैं, फिलहाल समय को देखते हुए बड़े सामूहिक कार्यक्रमों से बचा जा रहा है।

सवाल: पर्यटन संभावनाओं के विकास के लिए तैयारियां किस स्तर पर हैं।
जवाब: पर्यटन विकास के लिए तामिया, पेंच, देवगढ़ के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। जामसावंली मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। देवगढ़ के लिए एक महोत्सव प्लान किया जा रहा है। बहुत सारी योजनाएं हैं, पर समय कितना मिलेगा यह कहना मुश्किल है। कोविड की स्थितियां भी असर डालती हैं, फिर भी देवगढ़ को पर्यटन के नक्शे में उभारने के लिए बेस कैंप, मल्टीपरपज सेंटर, वर्ड वाचिंग की ट्ेनिंग, होम स्टे की व्यवस्थाओं पर मप्र टूरिज्म से समन्वय स्थापित करते हुए कार्य किया जा रहा है।


सवाल: कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए क्या कार्ययोजना चल रही है।
जवाब: फिलहाल शांत समय है, दूसरी लहर के संसाधन काम आ सकते हैं। बचाव के लिए अन्य जिलों की अपेक्षा मास्क पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। लगातार जुर्माना किया जा रहा है। महाराष्ट्र से जुड़े हुए क्षेत्रों सौंसर, पांढुर्ना सहित आदिवासी क्षेत्र मोहखेड़ में जल्द से जल्द दोनों डोज का वैक्सीनेशन की कार्ययोजना चल रही है। रोको टोको अभियान जारी है। बार्डर पर चेक पोस्ट अब भी लगे हुए हैं।

सवाल: डेंगू की रोकथाम और इलाज के लिए क्या किया जा रहा है।
जवाब: डेंगू साफ पानी में एडीज मच्छर के लार्वा से पनपता है, जिसकी रोकथाम के लिए घर घर जाकर जागरुकता एवं लार्वा नष्टीकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। मरीज आने पर स्पेशल मैपिंग की जा रही है। मच्छर स्प्रे, फॉगिंग सहित अस्पतालों में एलाइजा टेस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अब तक बंद रही प्लाज्मा यूनिट को भी शुरू कर दिया गया है, जो प्लेटलेट्स तक को अलग कर सकती है। प्राइवेट अस्पतालों से भी जानकारी ली जा रही है।


सवाल: मक्का का हब होने के बाद भी किसानों को अधिक लाभ नहीं मिल रहा है।
जवाब: छिंदवाड़ा मक्का का हब है। एक-दो एजेंसियां यहां प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी कर रही हैं। कार्य पूरा होने के बाद करीब 40 प्रतिशत मक्का यहीं खप जाएगा। इसके साथ ही संतरे की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की जगह उसकी छिंदवाड़ा के नाम से ब्रांडिंग करके विदेश तक एक्पोर्ट करने की योजना पर काम चल रहा है।

सवाल: जिले के संसाधन को लेकर क्या नजरिया है।
जवाब: छिंदवाड़ा पिछड़ा जिला नहीं है, विविध प्रकार के रिसोर्स हैं। मैगनीज, रेत, ग्रेनाइट, कोल खदानें, बड़े-बड़े उद्योग हैं। मक्का का हब है। गेहूं का भी रकबा पंाच गुना तक बढ़ा है। चारो दिशाओं में वैरायटी है। कपास, संतरा आदि की उन्नत पैदावार होती है। पातालकोट है। यहां सबसे खास बात यह है कि किसी भी काम को गंभीरता से लेने के बाद उसमें सफलता हर हाल में मिलती है। कोविड के समय प्रशासन की तुलना में दोगुनी मदद निजी सेक्टर से मिली।


सवाल: सवा साल के कार्यकाल में किन पलों को अविस्मरणीय मानेंगे।
जवाब: वैसे तो पूरा साल ही अलग-अलग अनुभवों के साथ रहा। कोविड के दौरान आगे बढ़ते हुए ऑक्सीजन का उत्पादन किया गया, जिससे छिंदवाड़ा ही नहीं प्रदेश के कई जिलों को आपूर्ति की गई। बंद प्लांट को जीरो से शुरू किया गया। राजस्व में भी अच्छा प्रदर्र्शन रहा। सीएम हेल्पलाइन निराकरण में भी अच्छे स्तर तक पहुंचे। एक-दो को छोडकऱ करीब सभी योजनाओं में शतप्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचे। बाढ़ की विभीषका को सकारात्मक दिशा के रूप में बदलते हुए चार सौ से अधिक पक्के आवासों का निर्माण, कोविड मैनेजमेंट का मॉडल बेस छिंदवाड़ा ही रहा है, जिसकी प्रधानमंत्री तक ने सराहना की। पूरे प्रदेश में छिंदवाड़ा मैनेजमेंट मॉडल को कई स्तरों पर स्वीकार किया गया।

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