सोसायटी में दिखी अनियमितता

सुर्खियों में रहने वाली कुंडालीकलां सोसायटी का परासिया विधायक सोहन बाल्मीक ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान यहां भारी आनिमियता सोसायटी की ओर से सामने आई

By: Prem Dehariya

Published: 24 May 2018, 04:59 PM IST

पोआमा/भमाड़ा. सुर्खियों में रहने वाली कुंडालीकलां सोसायटी का परासिया विधायक सोहन बाल्मीक ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान यहां भारी आनिमियता सोसायटी की ओर से सामने आई।
किसानों ने विधायक बाल्मीक से अपनी समस्याओं में बताया कि 4-5 दिन से बारदाने नहीं है और बेमौसम बारिश के कारण गेंहू खराब हो रहा है। गेंहू ढकने की कोई व्यवस्था नहीं है जमीन पर ही आधे से ज्यादा किसानों का गेंहू पड़ा है। सोसायटी प्रबंधन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। किसानों को पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा। इस पर विधायक सोहन बाल्मीक ने जिला कलेक्टर एवं जीएम से फोन पर बात की एवं किसानों की परेशानी से अवगत कराया। कलेक्टर एवं जीएम ने आश्वासन दिया है। किसानों को हो रही दिक्कतों तुरंत दूर किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान गु्ड्डू राऊत, उपसरपंच द्वारका वंशकार, नीरज सेन, पप्पू खान, सुभाष बेलवंशी, आकाश पटेल, ईश्वर चंद्रवंशी, दौलत साहू, जग्गनाथ पवार, पुनु पवार, लखन साहू, बेनी प्रजापति, रामकिशन साहू, मोहन पवार, जयदेव साहू, होरी चंद्रवंशी, अशोक सदानी, विपिन यदुवंशी, बीरबल माहोरे, बंटी यदुवंशी एवं अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से आये किसान मौजद थे।
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नकली बीजों से सावधान रहने की दी सलाह
सौंसर. बाजार में आने वाले कपास के नकली बीज से सावधान रहने की अपील कृषि विभाग कर रहा है। विभागीय तौर पर जानकारी में बताया कि कपास उत्पादक कृषक आरआर किस्म की या बीटी बोलगार्ड तकनीक का प्रयोग लगभग 15 वर्ष के अधिक समय से कर रहे है। किसानों को इस तकनीक से ज्यादा उत्पादन भी होता है लेकिन उत्पादन में ठहराव एवं कहीं कहीं गिरावट आने लगी है।
किसानों के कीटनाशक प्रयोग की लागत भी बढऩे लगी है। जानकारी में बताया कि इस तकनीक से किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए रसायनों का प्रयोग बढ़ गया है। हाल ही में कुछ कम्पनी किसान की समस्या का समाधान खरपतवार प्रतिरोधी कपास बीज जिसे बाजार में आरआर, या बिजी -4 के नाम से बेच रहे है। जिससे जिसमें खरपतवारनाशी रसायन का प्रयोग भी करते है। वह कपास के पौधे को छोडकर इस रसायन के प्रभाव से खेत की मिट्टी में उपलब्ध लाभकारी जीवाणु मर जाते है जो खेती की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी होते है। वहीं घातक रसायन का पर्यावरण में कृषक मित्रकीट भी मर जाते है। जो खेत में हानिकारक कीटों का भक्षण करते है।
बाजार में किसानों को मुहैया कराने वाले निजी कम्पनी के इस बीजों से मिट्टी की सेहत भी खराब होने लगी है। कृषि विभागीय अधिकारी आरजी जीवतोड़े ने बताया कि जो कि मनुष्य के शरीर में भी नए प्रकार के रोग उत्पन्न करता है। थोड़े लाभ के लिए ज्यादा हानि होने से बचने के लिए आरआर या बिजी-4 का प्रयोग ना करने की सलाह किसानों को दी जा रही है। आत्मा परियोजना के बीटीएम पंकज पराडकर ने द्वारा इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए जैवीक खेती को बढ़ावा देने की बात किसानों से की।

Prem Dehariya
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