क्षेत्र के ज्ञान के लिए उसका अध्ययन करना जरूरी

किसी भी देश की सभ्यता एवं संस्कृति को जानने के लिए इतिहास को जानना आवश्यक है।
इसी प्रकार क्षेत्र विशेष के ज्ञान के लिए उस क्षेत्र का अध्ययन जरूरी है।

छिंदवाड़ा/परासिया. किसी भी देश की सभ्यता एवं संस्कृति को जानने के लिए इतिहास को जानना आवश्यक है।
इसी प्रकार क्षेत्र विशेष के ज्ञान के लिए उस क्षेत्र का अध्ययन जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए शासकीय पेंचव्हेली स्नातकोत्तर महाविद्यालय परासिया के इतिहास विभाग द्वारा क्षेत्रीय इतिहास के विविध आयाम (सतपुड़ा क्षेत्र के संदर्भ में) विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्र एवं आलेखों को आईएसबीएन युक्त पुस्तक में प्रकाशित किया गया है जिसका संपादन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. धनाराम ने किया है।
क्षेत्रीय इतिहास के विविध आयाम पुस्तक का विमोचन महाविद्यालय के सभागार में प्राचार्य डॉ. पीआर चंदेलकर, डॉ. एके बारसिया, प्रो एसव्हीके सिंग, डॉ.मंजु माहुर पवार एवं डॉ. सुनीता सिंह चंदेल की उपस्थिति में किया गया। पुस्तक में सतपुडांचल के बालाघाट, मंडला, सिवनी, छिन्दवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगौन जिलों के इतिहास एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी का संकलन है। मुख्य धारा के इतिहास का अध्ययन में अक्सर क्षेत्रीय या स्थानीय इतिहास का अध्ययन छूट जाता है, इस मायने में इस पुस्तक में स्थानीय ऐतिहासिक सामग्री, पर्यटन स्थल, किवदंतियॉ, क्षेत्रीय नायक, जनजातियों को सम्मिलित किया गया है जो विद्यार्थियों एंव शोधार्थियों के लिए रूचिकर एवं उपयोगी साबित होगी।

Sanjay Kumar Dandale
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