कश्मीर का हैदर अली छोड़ देगा मुख्यमंत्री का गृह जिला, जानिए क्या है वजह

कश्मीर का हैदर अली छोड़ देगा मुख्यमंत्री का गृह जिला, जानिए क्या है वजह
कश्मीर का हैदर अली छोड़ देगा मुख्यमंत्री का गृह जिला, जानिए क्या है वजह

Ashish Kumar Mishra | Updated: 24 Aug 2019, 01:01:39 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

कश्मीर निवासी गुलाम हैदर अब पीजी कॉलेज में बीए की पढ़ाई नहीं कर पाएगा।

 

छिंदवाड़ा. कश्मीर निवासी गुलाम हैदर अब पीजी कॉलेज में बीए की पढ़ाई नहीं कर पाएगा। इसकी वजह है भाषा की समस्या। हैदर को उर्दू और अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान है जबकि कॉलेज में हिन्दी भाषा में पढ़ाई होती है। ऐसे में हैदर ने अब छिंदवाड़ा छोडऩे का फैसला लिया है। हैदर के रिक्वेस्ट पर एआईसीटीई ने उसे पंजाब के कॉलेज में दाखिला लेने का विकल्प दिया है। अब हैदर वही जाकर अध्ययन करेगा। हैदर ने बताया कि उसे छिंदवाड़ा आए कुछ दिन ही हुए हैं। छिंदवाड़ा काफी अच्छी जगह है उसे यहां रहना काफी पसंद आ गया था। यहां के लोग भी बहुत अच्छे हैं, लेकिन भाषा की वजह से दिक्कत हो रही है। दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत एआईसीटीई संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थियों को देश के विभिन्न कॉलेजों में अध्ययन के लिए भेजा जाता है। छात्रवृत्ति योजना के तहत इन मेधावी विद्यार्थियों को हर साल पढ़ाई के लिए एक लाख रुपए भी केन्द्र सरकार देती है। इस योजना के तहत ही हर वर्ष पीजी कॉलेज में केवल छिंदवाड़ा ही नहीं बल्कि जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थी भी अध्ययन करने के लिए दाखिला ले रहे हैं। हालांकि उनके सामने भाषा समस्या बनकर सामने आ रही है। कुछ विद्यार्थी हिन्दी भाषा सिखकर खुद को सशक्त बना लेते हैं तो कुछ पलायन कर जाते हैं।

पांच में से दो विद्यार्थी छोड़ेेगे कॉलेज
सत्र 2019-20 में पीजी कॉलेज में जम्मू और कश्मीर से पांच विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इसमें से एक बीए, एक कॉमर्स और तीन बीएससी संकाय में थे। अब इसमें से दो विद्यार्थियों ने भाषा की समस्या होने की वजह से कॉलेज छोडऩे का फैसला लिया है।

कॉलेज को मिलती है मानिटरिंग की जिम्मेदारी
जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थियों को दाखिला देने के बाद कॉलेज की जिम्मेदारी इनकी मानिटङ्क्षरग की रहती है। हालांकि कॉलेज इन विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा की समझ के लिए अलग से कोचिंग भी देने का प्रयास करता है।


हिन्दी भाषा के लिए दे रखी है जिम्मेदारी
जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थियों की देखरेख के लिए नियुक्त मेंटर्स पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. बीके डेहरिया ने बताया कि जम्मू के विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा अच्छे से समझ में आती है। उन्हें पढ़ाई में दिक्कत नहीं होती। समस्या कश्मीर के विद्यार्थियों के साथ होती है। इसके लिए हिन्दी विभाग को जिम्मेदारी भी दे रखी है।

 

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