Justice: 8 साल बाद रिश्वतखोर को न्यायालय ने सुनाई तीन साल की सजा

2014 को लोकायुक्त जबलपुर को लिखित शिकायत दी थी।

By: ashish mishra

Published: 15 Sep 2021, 01:07 PM IST


छिंदवाड़ा. न्यायालय द्वारा रिश्वत लेने के एक मामले में आरोपी का दोष सिद्ध होने पर तीन साल की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2014 का है। प्रार्थी पवन अग्रवाल ने दिसंबर 2014 को लोकायुक्त जबलपुर को लिखित शिकायत दी थी। जिसमें उन्होंने बताया कि वेंडर लाइसेंस के लिए उन्होंने जिला पंजीयक कार्यालय, छिंदवाड़ा में आवेदन सहायक ग्रेड-2 अधिकारी मोहम्मद शफी कुरैसी को दिया था। आरोप था कि मोहम्मद शफी कुरैसी ने प्रार्थी से वेंडर लाइसेंस का काम कराने के लिए 40 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। लोकायुक्त द्वारा प्रार्थी की शिकायत पर रिश्वत मांग संबंधी वार्ता रिकार्ड करने की लिए उसे वॉइस रिकार्डर दिया गया था। रिकार्डर में दर्ज वार्तालाप में रिश्वत की मांग संबंधी तत्थों की पुष्टि होने पर 3 दिसंबर 2014 को प्रार्थी की रजिस्टार कार्यालय छिंदवाड़ा में आरोपी से पैसे की लेन-देन की बात हुई और बातचीत के दौरान आरोपी ने 35 हजार रुपए रिश्वत लेने को तैयार हो गया और रिश्वत की राशि प्रार्थी के द्वारा देने पर रख लिया था। आरोपी को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त जबलपुर द्वारा रंगेहाथ गिरफ्तार कर उसके विरूद्ध विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना कार्यवाही की गई। विवेचना कर प्रकरण का अभियोग पत्र विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) छिंदवाड़ा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। विशेष न्यायाधीश ने प्रकरण में अभियोजन पक्ष एवं बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को पर विचार करने के पश्चात मोहम्मद सफी कुरैसी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास से और 5000 के अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी समीर कुमार पाठक द्वारा पैरवी की गई।

ashish mishra Desk
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