मार्मिक उद्बोधान- मां की सेवा चारों धाम के दर्शन से बढकऱ है, पढ़ें पूरी खबर

मार्मिक उद्बोधान- मां की सेवा चारों धाम के दर्शन से बढकऱ है, पढ़ें पूरी खबर

Rajendra Sharma | Updated: 14 May 2019, 09:12:04 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

मां से नि:स्वार्थ तो भगवान भी नहीं है

चांद कॉलेज में मदर्स डे पर मां की महत्ता पर व्याख्यान
छिंदवाड़ा/चांद. शासकीय कॉलेज चांद में मातृ दिवस के उपलक्ष्य में मां की महत्ता पर व्याख्यान माला आयोजित की गई। प्रमुख वक्ता डॉ. अमर सिंह ने कहा कि शास्त्रों में जननी व जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढकऱ बताया गया है। व्यक्ति को जन्नत के हर लम्हे का दीदार हो जाता है जब मां उसे गोद में उठाकर प्यार करती है। मां की सेवा चार धाम के दर्शन पुण्य से बढकऱ है। मां से नि:स्वार्थ तो भगवान भी नहीं है। मां में आंधियों को बांधने की शक्ति होती है। मां वेदों की मूल चेतना है जिसके कदमों में जन्नत होती है। मां ईश्वर की भेजी वह नायाब फरिश्ता है जिसकी गोद में मानवता सुरक्षित रहती है। ईश्वर सब जगह नहीं हो सकता था, अत: उसने मां बनाई। यकीनन मां वह फौलादी चट्टान है जिसके नीचे संतान खड़ी होकर गोवर्धन पर्वत सी सुरक्षित महसूस करती हैं। मां चलती फिरती चमत्कार है। अगर सारे देशों की मां मिल जाएं तो फिर विश्व युद्ध नहीं होंगे। जो मैं हूं और होने की उम्मीद करता हूं, इसके लिए मैं अपनी मां का ऋणि हूं। मां एक चमत्कारी ताबीज है जिससे सारे भ्रम दूर भागते हैं। मां की कोमल गोद सबसे जगह होती है एवं मानवता के होठों पर सबसे खूबसूरत शब्द है। पूर्णकालिक मां होना सबसे अधिक वेतन पाने वाला जॉब है जिसका भुगतान सिर्फ निखालिश प्रेम है। मां बनना आसान नहीं है, अगर होता तो सब बाप मां बन जाते। मां से बढकऱ कोई बहादुरी नहीं है और ताकत सभी कानूनों से अधिक है। दुनिया की कोई भी दौलत मां के दूध का कर्ज नहीं उतार सकती। मां का प्रेम वह ईंधन है जिसमें पगकर साधारण मनुष्य असाधारण बनता है।
इस मौके पर प्राचार्य डॉ. डीके गुप्ता ने मां की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां का ही एक ऐसा रिश्ता है जिसमें स्वार्थ नहीं होता है। इस संसार में वह इंसान बहुत खुशनसीब है, जिसके पास मां है। एक महिला को मां, पत्नी व राजनेता की भूमिका एक साथ निभानी
पड़ती है।
प्रो. राजकुमार पहाड़े ने अपने उद्बोधन में कहा कि सारा प्रेम मातृत्व से शुरू व इसी पर खत्म हो जाता है। मां की फूंक से बड़ी कोई मरहम नहीं। प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे ने मां की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां का दिल वह दरिया है जहां दया व प्रेम की अविरल धारा बहती है। प्रो. प्रदीप पटवारी ने कहा कि हमें मां द्वारा अपने बच्चों को एक मजबूत बुनियाद देने के लिए अहसानमंद होना चाहिए।
प्रो. योगेश अहिरवार ने अपने वक्तव्य में कहा कि मां व क्षमा एक ही पर्याय हैं। मां दूसरों के सुख में सबका साथी पर अपने दुख में अकेली दु:खी रहती है। मां प्रकृति की सृजनात्मकता की पारिवारिक इकाई है। डॉ. प्रकाश नागले ने अपने उद्बोधन में कहा कि मां रिद्धि सिद्धि की अविरल धारा, जमीनी जन्नत की देवदूत, घर में कुम्भ का स्नान व खरे सोने से बनी हृदय वाली है। कार्यक्रम को शोभित रघुवंशी, दीपू चौरिया, सोनिया यादव, अज्जू पाल, नीरज रघुवंशी, आकाश कुमरे, नेहा माहोरे, पूजा सोनी, दीपिका सोनी, दुर्गेश सिंगारे, मुकेश वर्मा व धूमराज वर्मा ने भी सम्बोधित किया। व्याख्यान समारोह में कॉलेज के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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