गिरफ्तारी से मौलिक अधिकार समाप्त होते हैं पर मूलभूत अधिकार नहीं

न्यायाधीशों ने जिला जेल के बंदियों को दी विधिक जानकारी

By: Rajendra Sharma

Published: 25 Apr 2018, 02:02 PM IST

 

छिंदवाड़ा. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के आदेशानुसार और जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एलडी बौरासी के निर्देशन में मंगलवार को जिला जेल में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं विधिक सहायता शिविर आयोजित किया गया।
शिविर का शुभारम्भ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरके डेहरिया ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित बंदियों को जिला विधिक प्राधिकरण की योजनाओं के साथ- साथ अपराध किए जाने की परिस्थिति, उसके पश्चात न्यायालयीन प्रक्रिया तथा विधिक सहायता प्रक्रि या के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने किसी भी कार्य को करने से पहले सोचने-समझने और इसके बाद करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति के अपराध करने के बाद उसकी गिरफ्तारी से मौलिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं, लेकिन
कुछ एेसे मूलभूत अधिकार होते हैं जो जेल में रहने पर भी समाप्त नहीं होते हैं। जैसे स्वच्छ जल, भोजन, वस्त्र और स्वस्थ्य रहने का अधिकार हमेशा बना रहता है।

पैरवी के लिए निशुल्क पैनल अधिवक्ता भी उपलब्ध

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बैस ने बताया कि समस्त बंदियों को विधिक सहायता प्रदान कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में अधिवक्ताओं का एक पैनल तैयार किया गया है। जो बंदी निशुल्क अधिवक्ता की मांग करता है। उक्त पैनल सूची में से एेसा अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। यदि किसी बंदी को अपने पैनल अधिवक्ता से कोई शिकायत है तो उसे लिखित रूप से जेलर अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को सूचित करना चाहिए। जिससे पैनल अधिवक्ता भी बदलकर दिया जा सके।
जिला विधिक सहायता अधिकारी सोमनाथ राय ने बताया कि विधिक सहायता एवं स्वास्थ्य शिविर के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरके डेहरिया, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष राजेन्द्र ङ्क्षसह बैस, जेलर राजकुमार त्रिपाठी, डॉ. लुहाडि़या, डॉ. सागर, पैरालीगल वॉलेंटियर श्यायमल राव एव अन्य अधिवक्ता पैरालीगल वालियंटर्स सहित जेल के कर्मचारी एवं बंदी उपस्थित रहे।

बंदियों की बीमारी पर विशेषज्ञ करते हैं इलाज

जेलर राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि जो अस्वस्थ्य बंदी का इलाज जेल की ही क्लीनिक में किया जाता है। गम्भीर रूप से बीमार होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका उपचार करती है। बता दें कि इस दौरान डॉक्टर लुहाडि़या एवं उनकी टीम ने बंदियों से टीबी जांच के लिए सेम्पल लिए गए। अलगा सेम्पल २५ अपै्रल को लिया जाएगा।

Rajendra Sharma Desk
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