Legislative Assembly: परासिया विधायक ने उठाया सवाल, सरकार ने दिया जवाब

पर्यटन स्थलों के लिए आठ करोड़ स्वीकृत पर सरकार ने नहीं दिया बजट

By: prabha shankar

Updated: 25 Feb 2021, 11:28 AM IST

छिंदवाड़ा। विधानसभा के प्रश्नकाल में परासिया विधायक सोहन बाल्मीक ने परासिया के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए स्वीकृत राशि न मिलने का सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि परासिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत खेड़ापति मंदिर परासिया, देवरानी दाई वाटरफाल, जिल्हेरी घाट, कोसमी हनुमान मंदिर में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए ८.१७ करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। पर्यटन विभाग द्वारा ठेकेदारों को टेंडर प्रदान कर, अनुबंध किया जा चुका है परंतु अभी तक शासन द्वारा राशि का आवंटन प्रदान नहीं किया गया है। पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर ने जानकारी एकत्र करने की बात कही।
विधायक बाल्मीक ने सवाल उठाते हुए कहा कि छिंदवाड़ा जिले में नवीन बोर खनन कार्य के निर्देश प्रदान नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न हो रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब नहीं में दिया। साथ ही परासिया क्षेत्र के लिए 11 नए नलकूप खनन स्वीकृत होना बताया।

पुरानी पेंशन लागू करने का विचार नहीं
जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने वर्ष 2005 से भर्ती हुए युवा कर्मचारी, अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना पुन: लागू करने की मांग पर विधानसभा में प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना बंद की गई है, उसे पुन: चालू करने राज्य सरकार विचार करेगी। वर्ष 1998 से 2004 तक नियुक्त संविदा एवं शिक्षाकर्मी को पुरानी पेंशन योजना की तो पात्रता है फिर उन्हें सरकार इस पुरानी पेंशन योजना से क्यों वंचित रख रही है? इस पर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य शासन में संविदा एवं शिक्षाकर्मी को पेंशन नियम लागू नहीं है। अत: पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर विचार करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। विधायक ने वित्त मंत्री से कर्मचारियों के समयमान वेतनमान के बारे में
भी पूछा।

संविदा के आधार पर स्टाफ की नियुक्ति
विधायक उइके ने कोविड संक्रमण के दौरान चिकित्सकों एवं अमले की नियुक्ति, उन्हें पद से पृथक करने तथा उनकी विभाग में संविदा अथवा नियमित पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था के बारे में सरकार से सवाल किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने जवाब दिया कि कोविड के बढ़ते प्रकरणों पर जिला स्तर पर नियोजित चिकित्सक, स्टाफ नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ को अस्थाई रूप से रखा गया। फिर कार्य अवधि बढ़ाई जाती रही। बाद में कोविड केयर सेंटर बंद होने से भी स्टॉफ की आवश्यकता सीमित किया गया। विभागीय पत्र में उल्लेख था कि ‘यह सेवाएं पूर्ण रूप से अस्थाई होंगी एवं आकस्मिक सेवाओं के रूप में ली जा रही हैं अत: इन सेवाओं को नियमित अथवा संविदा सेवा के लिए किसी भी दशा में मान्य नहीं किया जाएगा। अत: नियमितीकरण तथा संविदा पर रखने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है।

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