एक बोरे में आधा से एक किलो खाद कम

सोसायटियों में हो रहे इस खेल में नीचे गिरने वाली खाद को उठाकर अवैध रूप से बेच कर चांदी काटी जा रही है।

By: Sanjay Kumar Dandale

Published: 23 Jun 2019, 06:00 PM IST

पांढुर्ना. बारिश से चितिंत किसानों को सहकारी सोसायटी में बांटा जाने वाली खाद में सेल्समैन बड़ा खेल कर रहे है। खाद के बोरे उठाने और एक जगह से दूसरे स्थान पर रखने के दौरान इन्हें हुक मारकर फाड़ दिया जा रहा है। जिससे प्रति बोरे से आधा से एक किलो ग्राम तक खाद कम हो रही है। इससे किसानों को तो नुकसान होता है वहीं सेल्समैन की चांदी हो जाती है। किसानों ने आरोप लगाया है कि सोसायटियों में हो रहे इस खेल में नीचे गिरने वाली खाद को उठाकर अवैध रूप से बेच कर चांदी काटी जा रही है।
विकासखंड की लगभग सभी सहकारी सोसायटियों में यह खेल हो रहा है। थोड़ी सी खाद गिरी है कहकर किसानों का ध्यान हटा दिया जा रहा है। लेकिन प्रति बोरे से आधे से एक किलो तक खाद गिराकर प्रतिदिन सोसायटियों में चार से पांच बोरे तैयार किए जा रहे है जिसे तय दाम से कुछ कम में बेचकर अवैध रूप से रूपए कमाने का जमकर खेल हो रहा है।
इस बात से नाराज किसानों ने खाद के बोरियों पर हुक नहीं मारने की मांग की है जिससे उनके द्वारा खरीदी जाने वाली खाद उन्हें पूरी प्राप्त हो सकें।

पारडी में हुआ जमकर हंगामा:

शनिवार को इसी चालाकी को लेकर को सहकारी सोसायटी पारडी में किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसान पुरूशोत्तम बारंगे, मोहन कोरडे, जीवन निकोसे आदि किसानों ने बताया कि हर दिन खाद के बोरे पर हुक मारने के लिए कहकर बोरों में बड़े छेद किये जाते है। जिससे खाद बड़ी मात्रा में नीचे गिर जाती है। किसानों ने सोसायटी के भंडार कक्ष दिखाया जहां पर बड़ी मात्रा में खाद नीचे गिरी हुई दिखाई दी। वहीं इस खाद को एक ड्रम में जमा कर के रखा हुआ था जिसे अवैध रूप से बेचे जाने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना था कि इस नुकसान की सोसायटी भरपाई करें।

किसानों ने बताया कि सबसे महंगा डीएपी 1400 रुपए 50 किग्रा का बैग खरीदना पड़ रहा है। इन बैगों में हुक मारकर 250 से 400 500 ग्राम खाद नीचे गिरा दिया जा रहा है। इससे किसानों को 150 से 200 रुपए तक नुकसान हो रहा है। जब हमने इसकी शिकायत प्रबंधक से तो उन्होंने हंस कर कह दिया कि ऐसा तो होता ही है।

हम्माल हुक मारकर ही बोरे उठाया करते है। खाद नीचे गिरने के कारण किसानों को नुकसान होता है इसमें हमारी कोई गलती नही है।
सुरेश रिठे, प्रबंधक सेवा सहकारी सोसायटी पारडी

Sanjay Kumar Dandale
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