आधे में भी नहीं बिक रही मिर्च लॉकडाउन के चलते व्यापार बंद

25 से 30 रुपए प्रति किलो मिलने थे दाम


छिंदवाड़ा / कोरोना के संक्रमण और उसके खतरे के बीच लोग शारीरिक परेशानियों से तो दो-चार हो ही रहे हैं, लेकिन आर्थिक हालातों के चलते एक बड़ा तबका परेशान हो रहा है। लॉकडाउन के चलते व्यापार बंद पड़ा है। ऐसे में मौसमी सब्जियां लगाकर कमाई के सपने देखने वाले किसान मायूस हो गए हैं।
गणेश विश्वकर्मा ने तीन एकड़ खेत में हरी मिर्च लगाई थी। पौधे तो बहुत अच्छी तरह से पनपे और उत्पादन भी अच्छा हुआ, लेकिन किस्मत इस बार ऐसे पलटी मारी कि एक भी मिर्च तोडकऱ बाजार में बेचने लायक नहीं बची। गणेश बताते हैं कि उन्होंने तीन एकड़ में 22 हजार रुपए का तो सिर्फ बीज ही डाला। उसके बाद मल्चिंग विधि से मिर्च का उत्पादन लिया। इस पर लगभग एक लाख रुपए का खर्च आया। अब जब फल लगे और बाजार में बेचने का मौसम आया तो लॉकडाउन हो गया। गणेश ने बताया कि करीब 100 बोरा मिर्च लगी है। बाजार सामान्य रहता तो कम से कम 25 से 30 रुपए किलो बिकती, लेकिन वर्तमान में बाजार ही ठप पड़ा हुआ है। एक रुपए की भी मिर्च नहीं बिकी। अब मिर्च बड़ी होकर कड़ी हो रही है। रंग भी सफेद पड़ रहा है। ऐसे में अब इसे तोडकऱ फेंकने के अलावा और कोई चारा नहीं है। उनका कहना है यदि मिर्च तोडकऱ नहीं हटाई तो अगले फल सही तरीके से नहीं आ पाएंगे।


तीन एकड़ में लगी मिर्च को तोडकऱ फेंकने की आ गई नौबत
मिर्च की आस में ले लिया टै्रक्टर

मि र्च से कमाई की आस में गणेश के पिता ने बैंक से टै्रक्टर भी फाइनेंस करा लिया। आने वाले जून-जुलाई में उसके 80 हजार रुपए जमा कराना है। परिवार को अब यह चिंता सता रही है कि यह पैसे कहा से लाएं। उनका कहना है क्षेत्र में उनके जैसे कई किसान हैं जो ऐसे ही हालात से जूझ रहे हैं।

खेत में ही सूख गया खीरा

अ पने गुरैया स्थित खेत के दो एकड़ क्षेत्र में उन्होंने खीरा भी लगाया था। यह खीरा भी खेत में पड़ा-पड़ा पीला पड़ कर सूख रहा है। दो-तीन रुपए प्रति किलो बेचने के बजाए उन्होंने इसे खेत में लगा रहने दिया। खेत के जो हाल हंै उस तरफ देखने की भी इच्छा नहीं हो रही। खीरा से भी उन्हें एक रुपए का फायदा इस बार नहीं हुआ।

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chandrashekhar sakarwar
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