Lockdown: ट्रांसपोर्टिंग लॉक तो आपूर्ति डाउन

Lockdown: खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल, मांग के विपरीत सिर्फ 20 प्रतिशत हो रही आपूर्ति: चिल्लर बाजार के छोटे खरीदारों पर असर

By: prabha shankar

Published: 09 Apr 2020, 10:00 AM IST

छिंदवाड़ा/ लॉकडाउन के कारण आम आदमी नकद की समस्या से वैसे ही जूझ रहा है, इधर चिल्लर बाजार में खाद्य पदार्थ अब महंगे होते जा रहे हैं। लॉकडाउन के पहले सप्ताह तक तो मामला ठीक था, लेकिन अब इसका असर बाजार पर दिख रहा है।
पैकेट युक्त खाद्य तेल और अन्य जरूरत की सामग्रियां महंगी हो गईं हैं। खाद्य तेल के एक लीटर का पैकेट बाजार में 100 रुपए का हो गया है। तुअर की दाल भी सात से आठ रुपए महंगी हो गई है। चावल के दाम भी दो से चार रुपए प्रति किलो बढ़ गए हैं। चिल्लर व्यापारी स्थानीय थोक व्यापारी या स्टॉकिस्टों द्वारा दाम बढ़ाए जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन बाजार सूत्रों के अनुसार लॉकडाउन के कारण जरूरी चीजों की ट्रांसपोर्टिंग की स्थिति खराब होने के कारण ऐसा हो रहा है।
थोक व्यापारियों का कहना है कि ऑर्डर डले हुए हैं। जो चीजें बाहर से आती हंै उनकी ट्रांसपोर्टिंग बेहद धीमी है। डबल ट्रांसपोर्ट में भी चीजें नहीं आ पा रहीं। जहां निर्माण होता है वे फैक्ट्रियां भी बंद हैं। इसका असर बाजार में देखा जा रहा है।
इस सम्बंध में लोगों का कहना है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस बात पर भी ध्यान देना होगा और ऊपरी स्तर पर बढ़ रहे दामों पर अंकुश लगाना होगा।

सोयाबीन 500 रुपए क्विंटल तक तेज: सोयाबीन का दाना अचानक 400 से 500 रुपए क्विंटल तेज हो गया है। इसका असर तेल पर भी दिख रहा है। तेल जिले में बाहर से आता है। इंदौर और भोपाल से इसकी सप्लाई होती है। वहां से पैकिंग वाला तेल महंगा मिल रहा है। यही कारण है कि चिल्लर बाजार में इसके दामों में एकदम से उछाल आया है।

दाल में भी सात से आठ रुपए की तेजी
गांधीगंज स्थित थोक बाजार के व्यापारियों का कहना है कि जो तुअर की दाल 52 रुपए किलो तक थी वो अब 59 से 60 रुपए पहुंच गई है। इससे खुले बाजार में दाम बढऩा वाजिब है। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। इसलिए भी जिन व्यापारियों के पास स्टॉक खत्म हो गया है, वे नई खरीदी नहीं कर रहे हैं। क्योंकि स्टॉक होने पर व्यापारियों को नियम व शर्तों के साथ आपूर्ति करना होगा, जिसमें घाटे की आशंका है। बड़े स्टॅाकिस्ट ये रिस्क नहीं लेना चाह रहे। जिनके पास पहले से स्टॉक है वे ही अपना माल निकाल रहे हैं।
शक्कर, आटा में कम तेजी
शक्कर और आटा दोनों छिंदवाड़ा में बनते हैं। आटा तो पुरानी कीमत पर ही बाजार में एक और पांच किलो के पैक में उपलब्ध है, जबकि शकर में हल्की तेजी बताई जा रही है।
पंजाब एग्रो के शशांक जुनेजा ने बताया कि गर्मी में हर वर्ष 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल उछाल रहता है, जबकि शक्कर में इस बार सिर्फ 50 से 60 रुपए की तेजी है जो बिल्कुल न के बराबर है। इधर, गांधीगंज में थोक विक्रेता शरद पनपालिया ने बताया कि ऐसी स्थिति में स्थानीय थोक व्यापारियों पर सामान महंगा करने के आरोप लगते हंै जो गलत है। ऊपरी स्तर पर बाजार के महंगा होने के
कारण ऐसा हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में जरूरी खाद्य सामग्री की उपलब्धता बेहतर है और तीन महीनों तक जिले के थोक व्यापारी चीजों की आपूर्ति कर सकते हैं।

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