Lockdown : आवागमन बंद रहने से बेभाव हो गए तरबूज-खरबूज

मोहखे्रड़ क्षेत्र के किसानों की लागत भी नहीं निकली

By: Rajendra Sharma

Published: 24 May 2020, 05:48 PM IST

पिछले साल देशभर में बेची गई थी उपज

छिंदवाड़ा/ कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने लगाए गए लॉकडाउन के तीन चरण में देशव्यापी आवागमन बंद रहने से जिले के किसानों को तरबूज-खरबूज की उपज थोक में बेभाव बेचनी पड़ी। इससे उनकी फसल की लागत भी नहीं निकल सकी। इस वर्श उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
जिले के मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम बीसापुर, परसगांव, मोहखेड़, बोहजर, छिंदवाड़ा के गांगीवाड़ा तथा परासिया के रिधोरा में गर्मी के सीजन में इन फलों की खेती होती है। किसान इस फसल को ड्रिप मल्टी सिस्टम के जरिए तैयार करते हैं और दवा, खाद और निरंतर निगरानी से फल तक पहुंचाते हैं। पिछले साल तक इन दोनों फलों का बाजार हैदराबाद, लखनऊ, जबलपुर और नागपुर तक था। व्यापारी सीधे किसानों के खेतों में आकर सौदा कर लेते थे और अच्छी मूल्य पर फल को खरीद कर ले जाए लेते थे। इस बार लगातार कोरोना लॉकडाउन से आवागमन बंद रहा। इसका असर यह हुआ कि तरबूज के थोकबंद भाव 14-15 रुपए से सीधे 4-5 रुपए पर आ गए। वहीं खरबूज के भाव इसी अनुपात में पांच रुपए तक आ गए। इससे किसानों की आय पर बुरा असर पड़ा है।
बीसापुर के किसान रघुवीर मोहने का कहना है कि एक एकड़ की फसल में करीब 70 हजार रुपए की लागत आती है। पिछले साल उन्होंने 1.70 लाख रुपए कमाए थे। इस बार लॉकडाउन से तरबूज-खरबूज बेभाव हो गए। उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। कमोबेश यही स्थिति पूरे मोहखेड़ विकासखंड के किसानों की है। वह लागत से भी कम रेट पर इस उपज को स्थानीय स्तर पर बेचने के लिए मजबूर हैं।

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Rajendra Sharma Desk
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