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mahashivratri: आठ ज्योतिलिंग में 151 किलो का त्रिशूल अर्पित कर चुका है यह जत्था, भोले के प्रति है अटूट श्रद्धा

खर्च कमेटी एवं भोलेनाथ के भक्तों के आपसी सहयोग से होता है।

छिंदवाड़ा

Updated: February 24, 2022 10:56:21 pm



छिंदवाड़ा. देवों के देव महादेव के यूं तो करोड़ों भक्त हैं, लेकिन छिंदवाड़ा निवासी इन भक्तों की भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति देखते ही बनती है। ये भक्त अब तक आठ ज्योतिर्लिंग शिवालयों में पहुंचकर 151 किलो का भव्य त्रिशुल अर्पित कर चुके हैं। श्री चौरागढ़ पंच कमेटी, श्री बड़ी माता मंदिर एवं राम मंदिर समिति के सदस्य ज्योतिर्लिंग शिवालयों में त्रिशुल अर्पण करने जाते हैं। त्रिशूल बनाने में लगभग 15 दिन लगता है। पूरा खर्च कमेटी एवं भोलेनाथ के भक्तों के आपसी सहयोग से होता है। शिवरात्रि के एक माह के भीतर कमेटी के 50 लोगों का जत्था त्रिशूल को लेकर जाता है और ज्योतिर्लिंग में मंदिर ट्रस्ट को समर्पित करता है। इसी तारतम्य में विशाल त्रिशूल शोभायात्रा 25 फरवरी को कमेटी के तत्वावधान में दोपहर 12 बजे निकाली जाएगी। शोभायात्रा में भोलेनाथ की झांकी आकर्षण का केन्द्र होगी। डीजी के धुन परहर-हर महादेव के जयघोष साथ श्री बड़ी माता मंदिर से शोभायात्रा प्रारंभ होगी जो नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए बस स्टैंड पहुंचेगी। इसके पश्चात भूराभगत मार्ग से दुर्गम घाटियों से होते हुए यात्रा चौरागढ़ पहुंचेगी। यहां महादेव बाबा को 151 किलो का त्रिशूल समर्पित कर पुन: वापस लाया जाएगा। शिवरात्रि में महाकाल मोक्षधाम मंदिर में त्रिशूल को दर्शनाथ हेतु उचित स्थान में लगाया जाएगा।
mahashivratri: आठ ज्योतिलिंग में 151 किलो का त्रिशूल अर्पित कर चुका है यह जत्था, भोले के प्रति है अटूट श्रद्धा
mahashivratri: आठ ज्योतिलिंग में 151 किलो का त्रिशूल अर्पित कर चुका है यह जत्था, भोले के प्रति है अटूट श्रद्धा
वर्ष 2024 में होगी पूर्ण आहुति
कमेटी द्वारा इस वर्ष बनारस में श्री काशी विश्वनाथ और झारखंड में श्री बाबा वैधनाथ ज्योतिर्लिंग शिवालय में त्रिशूल अर्पित किया जाएगा। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि आगामी वर्षों में शेष 2 ज्योतिर्लिंग शिवालय में परम्परानुसार त्रिशूल अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024 में 12 ज्योतिर्लिंगो में त्रिशूल अर्पित करने का महायज्ञ की पूर्ण आहुति, शिव महापुराण, विविध अनुष्ठानों, पूजन पाठ के साथ कार्यक्रम को संपन्न किया जाएगा।

वर्ष 2013 में हुई थी शुरुआत
श्री चौरागढ़ पंच कमेटी के सरंक्षक सतीश दुबे (लाला) ने बताया कि 80 के दशक से निरंतर चौरागढ़ महादेव को भव्य त्रिशूल अर्पित किया जा रहा है। शुरुआत में छोटे त्रिशूल लोहे, तांबा, पीतल, जस्ता, चांदी, निकल पालिश एवं अन्य प्रकार की धातुओं के त्रिशूल कमेटी के द्वारा भेंट किया जा चुका है। इसी दौरान कमेटी ने बड़ा संकल्प लिया। वर्ष 2012 के बाद त्रिशूल को चौरागढ़ महादेव से पुन: छिंदवाड़ा लाकर 12 ज्योतिर्लिंगों पर अर्पित करने की परंपरा शुरू करने का निर्णय कमेटी द्वारा लिया गया। इसके पश्चात सर्वप्रथम वर्ष 2013 में स्टेनलैस स्टील से निर्मित भव्य त्रिशूल को कमेटी द्वारा भगवान चौरागढ़ महादेव के बाद श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को अर्पित कर परंपरा की शुरुआत की गई। इस परंपरा को अब आगे बढ़ाया जा रहा है।
कोविड की वजह से लगा था विराम
2013 से शुरू हुई 12 ज्योतिर्लिंगों में त्रिशूल अर्पित करने की परंपरा को 2021 में कोविड महामारी के चलते विराम लगा था। कमेटी ने वर्ष 2022 में एक साथ 2 ज्योतिर्लिंगों पर दो अलग-अलग त्रिशूल अर्पित करने का निश्चय किया है। महाशिवरात्रि पर चौरागढ़ महादेव को त्रिशूल अर्पित करने के बाद जल्द ही जल्था एक साथ 2 त्रिशूलों को लेकर श्री काशी विश्वनाथ और श्री बाबा वैधनाथ धाम की यात्रा के लिए रवाना होगी।

केदारनाथ की दुर्गम यात्रा ने ली थी परीक्षा
वर्ष 2018 मई माह में कमेटी के 40 लोगों का जत्था उत्तराखंड में स्थित बाबा केदारनाथ के धाम 151 किलो का त्रिशूल अर्पित करने के लिए रवाना हुआ था। सदस्यों ने गौरीकुंड मार्ग से 27 किलोमीटर की दुर्गम पहाड़ी रास्ते से होते हुए करीब 24 घण्टे में अपना सफर पूर्ण किया गया। इस सफर में सदस्यों के सामने कई कठिनाई भी आई, लेकिन भोले की प्रति अटूट श्रद्धा की वजह से हर मुश्किल राह आसान हो गई। भक्त त्रिशूल को अपने कंधे पर रखकर बाबा केदारनाथ के दर पर पहुंचे और समिति को त्रिशूल को समर्पित किया।

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