गेहूं, मक्का से ज्यादा निजीकरण की चिंता में डूबे मण्डी कर्मचारी

हर दिन राज्य सरकार के आदेश में संशोधन की कर रहे प्रार्थना: वेतन के साथ अस्तित्व का सवाल कर रहा परेशान

By: prabha shankar

Published: 17 Jun 2020, 06:05 PM IST

छिंदवाड़ा/ कृषि उपज मंडी कुसमैली में इस समय गेहूं, मक्का और आमचूर की आवक हो रही है, लेकिन मंडी कर्मचारियों को मंडी के निजीकरण की चिंता खाए जा रही है। वे मंडी मॉडल एक्ट में संशोधन के लिए हर दिन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। कर्मचारी मान रहे हंै कि जिस दिन यह मॉडल प्रभावी हो जाएगा, सरकारी मंडी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और उनके समक्ष वेतन के लाले पड़ जाएंगे।
मंडी प्रांगण कार्यालय में प्रवेश करो तो कर्मचारियों का कृषि उपज मंडी एक्ट 1972 में संशोधन का मॉडल एक्ट का विरोध का बैनर दिख जाएगा। पूरे कार्यालय में अनाज जिंस की आवक की बात करो तो कर्मचारी निजीकरण का जिक्र छेड़ देते हैं। इस चिंता का असर ऊपर मंडी शेड में हो रही अनाज की बोली में उपस्थित किसान और व्यापारियों में भी दिखता है। कर्मचारी कह रहे हैं कि मॉडल एक्ट लागू होने से बड़ी कम्पनियां सीधे किसानों से खरीदी कर लेगी। सरकारी मंडी में कोई किसान नहीं आएगा तो फिर डेढ़ प्रतिशत मंडी टैक्स कैसे वसूल करेगा? आखिर इससे ही पूरे मंडी अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन होता है। इस चिंता ने उनकी नींद उड़ा दी है। मंडी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संतोष श्रीवास्त्री का कहना है कि प्रांतीय संगठन इस मॉडल एक्ट के संशोधन के लिए प्रयासरत हूं।
सीएम से मंडी विभाग के माध्यम से किसानों के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए नियम बनवाने का आदेश पारित करने की अपेक्षा की जा रही है। इससे किसान, लघु एवं मध्यम वर्गीय व्यापारी एवं मंडी विभाग के कर्मचारियों का अहित नहीं होगा।

लापरवाह सचिवों का रुकेगा वेतन
छिंदवाड़ा ञ्च पत्रिका. कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जनपद पंचायत छिंदवाड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मानव दिवस की न्यूनतम प्रगति पाए जाने पर सम्बंधित ग्राम पंचायतों के सचिव एवं रोजगार सहायकों के सात-सात दिनों के वेतन को रोकने के निर्देश दिए।

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