Master Plan: राजनीतिक दबाव की दरकार, अधिकारी कह रहे करना होगा इंतजार

नगर एवं ग्राम निवेश विभाग भोपाल में अटकी फाइल: पक्ष-विपक्ष के नेता भी नहीं ले रहे रुचि

By: prabha shankar

Published: 27 Nov 2020, 05:55 PM IST

छिंदवाड़ा। राजनीतिक दबाव के बिना शहर का मास्टर प्लान-2031 शायद ही अस्तित्व में आ पाएगा। भाजपा और कांग्रेस सरकार के समय में भी इसे लागू नहीं किया जा सका है। कमलनाथ सरकार के समय नए 27 गांवों को शामिल करने की अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन गांवों के नक्शे डिजिटल करने मेपकास्ट को भेजे जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तब से नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि अभी इंतजार करना होगा।
मास्टर प्लान-2011 के समाप्त हुए दस साल बीत गए। उसके बाद नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों ने नगरपालिका होने से उसमें 14 गांव शामिल कर इसका ब्लू प्रिंट जारी किया गया था। नगर निगम के गठन के बाद वर्ष 2017 में नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने मास्टर प्लान को संशोधित कर उसमें 25 गांव शामिल किए। इसके बाद प्लान को अंतिम प्रकाशन के लिए भोपाल भेजा गया। इस पर सरकार फैसला कर पाती, इसके बाद वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कमलनाथ सरकार आई तो इस मास्टर प्लान में 2019 में फिर संशोधन करते हुए उसका निवेश क्षेत्र बढ़ाया गया और 27 नए गांव जोड़े गए और राजपत्र में इसका प्रकाशन कराया गया।
नगर एवं ग्राम निवेश विभाग इन नए गांवों के डिजिटल नक्शे मेपकास्ट से बनवा पाता, इससे पहले ही कांग्रेस सरकार गिरी और कोरोना संक्रमण से लॉकडाउन लागू हो गया। उसके बाद से ही भोपाल में फाइल अटकी पड़ी है। कहा जा रहा है कि जब तक भाजपा के जनप्रतिनिधि इस मास्टर प्लान पर रुचि नहीं दिखाएंगे, तब तक शायद की यह अस्तित्व में आ पाएगा।

ग्रीन से यलो न होने से नहीं बने मकान
शहर का मास्टर प्लान पास न होने से शहर के आसपास घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रयोजन की भूमि तय नहीं हो पा रही है। इससे शैक्षणिक हब, ट्रांसपोर्ट नगर, नए बाजार समेत कई प्रोजेक्ट लटके पड़े हैं। इसके अलावा लोगों की जमीन ग्रीन जोन में फंसी है, जहां उन्हें मकान बनाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। इस पर नेताओं की अरुचि बनी होने से मास्टर प्लान उपेक्षित पड़ा हुआ है।

इनका कहना है
छिंदवाड़ा का मास्टर प्लान भोपाल में विभागीय कार्यालय में प्रक्रियाधीन है। इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।
अरविंद जैन, सहायक संचालक, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग

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