मुसीबत में मक्का: आर्मी वर्म फाल कीट का आक्रमण, जानिए कैसे बचेगी आपकी फसल

मुसीबत में मक्का: आर्मी वर्म फाल कीट का आक्रमण, जानिए कैसे बचेगी आपकी फसल
Mecca crop in trouble

Prabha Shankar Giri | Updated: 07 Jul 2019, 11:46:29 AM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

15 से 20 दिन के पौधे आए चपेट में

छिंदवाड़ा. पिछले वर्ष देश के दक्षिणी भाग में मक्का की फसल को बर्बाद कर चुके आर्मी वर्म फाल कीट ने जिले में भी आक्रमण कर दिया है। 15 से 20 दिन के मक्का के पौधों में इस कीड़े का प्रकोप दिख रहा है। जानकारी मिलते ही कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक और कीट विशेषज्ञों ने शनिवार को जिले का दौरा किया और खेतों में वास्तविकता देखी। अधिकारियेां का कहना है कि मक्का के छोटे पौधों को अपनी जद में ले चुका कीड़ा अभी अपनी दूसरी अवस्था में है। यदि इसका उपचार जल्द न किया गया और यह बड़ी इल्ली में परिवर्तित हो जाएगा। तब फसल को बचाना मुश्किल होगा। वैज्ञानिकों ने किसानों को हर पौधे को देखने और अनुशंसित दवाओं का छिडक़ाव करने को कहा है।
शनिवार को छिंदवाड़ा के अलावा, बिछुआ, अमरवाड़ा और परासिया में कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों की टीम ने दौरा किया। छिंदवाड़ा विकासखंड में उपसंचालक कृषि जेआर हेडाउ, कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसडी सावरकर, एसडीओ धीरज ठाकुर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सीएम अवस्थी ने दौरा किया तो अन्य विकासखंडों में वहां के मैदानी अधिकारियों ने खेतों में जाकर पौधें पर लगे कीड़ों को देखा। गौरतलब है कि आर्मी वर्म फाल कीट के प्रकोप की आशंका पहले ही विभाग और वैज्ञानिक जता चुके हैं।
पिछले दो महीने से इसके सम्बंध में किसानों को बराबर जागरूक भी किया जा रहा है।
इन गांवों में देखे हालात
विशेषज्ञों और अधिकारियों की टीम में छिंदवाड़ा विकासखंड में बीजेपानी, सहपुरा, सलैया, सोनापीपरी, कोटलबर्री, गुरैया, रोहना, भानादेही, खैरवाड़ा, पिंडरई, सुसरई, पुलपुलडोह का दौरा किया। यहां सभी जगह कीट का प्रकोप देखने को मिला। उपसंचालक हेडाउ ने बताया कि जिन किसानों ने गर्मी की मक्का बोई थी वहां तो फसल को कीट ने बुरी तरह क्षति पहुंचाई है।

15 दिन से ज्यादा के पौधों में प्रकोप
जिले में जिन किसानों ने 20 जून के पहले बोनी की थी और जहां पौधे 15 दिन से ज्यादा के हो गए हैं, उनमें इस कीट ने आक्रमण कर दिया है। जिले में कई इलाकों में किसानों ने इस दौरान बोनी कर दी थी। गर्मी ज्यादा होने और पानी न गिरने के कारण इन पौधों में आर्मी वर्म को अनुकुल मौसम मिला और उसने आक्रमण कर दिया। अधिकारियों ने किसानों को सचेत करते हुए गम्भीरता और सूक्ष्मता से पौधों को देखने और कीट दिखने पर उसके प्रभावी उपाय करने कहा है।

अभी भी किया जा सकता है नियंत्रण
कीट विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कीट दूसरी अवस्था में है। पूरी इल्ली बनने में इसे समय लगेगा। इसलिए यदि अभी इसका उपाय किया जाए तो कीट को नष्ट किया जा सकता है। किसान घबराए नहीं। खेत में पौधों की पत्तियों में लम्बाई में जो छिद्र दिखाई दे रहे हैं, नजदीक से पोंगली के अंदर देखो और यदि इल्ली दिखाई दे तो कीटनाशक का छिडक़ाव करें।
ये दवाई डाले किसान
आर्मी वर्म को नियंत्रण में करने के लिए किसानों को इमामेक्टीन बेन्झोएट 5 एसजी 0.5 ग्राम दवा प्रति लीटर के दर से आठ से दस पम्प प्रति एकड़ में घोल को मक्के की पोंगली की दिशा में छिडकऩे कहा है। जहां पर अभी आक्रमण कम या नहीं दिखाई दे रहा है वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से क्लोरपायरीफास 20 ईसी 2 मिली प्रति लीटर की दर से छिडकऩे कहा गया है। खेत में अधिक आक्रमण दिखाई देने पर प्निोसड 45 एससी 0.3 मिमी, क्लोरअन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 0.3 मिली इंडोक्झेकार्ब 14.5 प्रतिशत एससी 0.1 मिली या थायोमेथाक्टम लम्बडासायहलोथिन 0.5 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोल कर छिडकऩे को कहा है। उपसंचालक ने कहा है कि यह दवाएं दुकानों पर उपलब्ध है। इसके अलावा एनएफएल
और इफकों की दवाएं कुछ मात्रा में कृषि विभाग के पास है। इस संबंध में किसान कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं। विभाग इन दवाओं को कंपनी से और बुला रहा है ताकि किसानों को विभाग के जरिए भी दवाएंउपलब्ध कराई जा सके।

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