मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आधी रात में भर रहे पेयजल, जानें वजह

- कॉलेज प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान, डेढ़ वर्ष पहले पीआइयू ने भेजे हैंडओवर के दस्तावेज

By: Dinesh Sahu

Updated: 24 Jun 2020, 11:11 AM IST

छिंदवाड़ा/ छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस परिसर में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। स्थिति यह है कि कोरोना ड्यूटी कर आधी रात में डॉक्टरों को पानी भरना पड़ रहा है। मामले में डीन से शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि मरम्मत के अभाव में परिसर में लगे ट्यूबवेल की मोटर बार-बार खराब हो जाती है।

किसी तरह चंदा एकत्रित कर मोटर सुधरवाई जाती है। शासकीय निर्माण एजेंसी पीआइयू के मार्गदर्शन में बिल्डिंग तैयार हो गई, पर मेंटनेंटस की जिम्मेदारी किसकी होगी यह तय नहीं हो सका है। बताया जाता है कि कैम्पस में सीनियर, जूनियर डॉक्टरों के करीब 55, चतुर्थश्रेणी कर्मी चार अपने परिवार समेत रहते है तथा होस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राएं अलग है, जो पानी की समस्या से जूझते रहते है। कॉलेज प्रशासन द्वारा समाधान नहीं होने पर अब डॉक्टरों में रोष व्याप्त है तथा वे अन्यत्र क्षेत्र जाने का मन बना रहे है।


हैंडओवर को लेकर भी नहीं कुछ स्पष्ट -


सिम्स प्रशासन और पीआइयू दोनों ही विभाग आपस में द्वंद्व कर रहे है। सिम्स प्रशासन कहता है कि हैंडओवर नहीं हुआ तथा इसके कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है। वहीं पीआइयू प्रशासन डेढ़ वर्ष पहले ही दस्तावेज उपलब्ध करा देने का दावा करता है।


बिजली बिल भी सरकार कर रही भुगतान -


निर्माण एजेंसी द्वारा परिसर में बिजली के संसाधन उपलब्ध करा दिए तथा कैम्पस में एचटी श्रेणी का कनेक्शन दिया गया है, जिसका हर माह हजारों रुपए बिल आता है, जो की राज्य सरकार द्वारा ही विगत कई वर्षों से भुगतान किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन द्वारा शासकीय क्वॉटरों पर सब-मीटर नहीं लगाए और न ही विभागीय कर्मचारियों से वसूली जाने वाली फीस तय हो सकी है, जिसके वजह से ऐसी स्थिति बनी हुई है।


पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है -


पानी की शिकायत का समाधान कर दिया गया है तथा पीआइयू ने टूटी पाइप लाइन की मरम्मत का आश्वासन दिया है। कॉलेज प्रशासन को अब तक हैंडओवर के दस्तावेज नहीं मिले है।


- डॉ. जीबी रामटेके, डीन

बिल्डिंग बना दी गई, मरम्मत कॉलेज को करना चाहिए -


डेढ़ वर्ष पहले ही हैंडओवर के दस्तावेज कॉलेज प्रशासन को उपलब्ध करा दिए गए है तथा ठेकेदार द्वारा बिल्डिंग बना दी गई है, अब मरम्मत उन्हें ही करना चाहिए। पांच वर्ष तक भवन का रख-रखाव का अनुबंध है।


- अवनींद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री पीआइयू

COVID-19
Show More
Dinesh Sahu
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned