लघु वनोपज पर बिचौलियों का कब्जा

सीसीएफ ने तीनों डिविजन के लघु वनोपज संचालकों को लिखा पत्र

By: mantosh singh

Published: 21 Jun 2021, 05:26 PM IST

छिंदवाड़ा. अचार गुठली, आंवला, हर्रा, बहेड़ा समेत ज्यादा लघु वनोपज के व्यापार में बिचौलियों का कब्जा है और सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी न के बराबर है। वन विभाग की अपनी दुकानें भी शोपीस साबित हो रही है। इससे जंगलों में रह रहे आदिवासियों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आ पा रहा है। फिलहाल वनोपज की सरकारी खरीदी बढ़ाने के लिए सीसीएफ ने पूर्व,पश्चिम और दक्षिण वनमण्डल के लघु वनोपज यूनियन संचालकों को पत्र लिखा है।

जिले के 11,815 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में3.51 लाख हैक्टेयर यानी 29.73 प्रतिशत हिस्से में जंगल है। इनमें 53 वानिकी प्रजातियां पाई जाती हैं। राज्य शासन ने 32 लघु वनोपजों की खरीदी का सरकारी समर्थन मूल्य घोषित किया है। इसके लिए 24 अपनी दुकानों का निर्माण भी किया गया है। मैदानी स्तर पर देखने में आया है कि लघु वनोपज को खरीदने में बिचौलिए जितनी तेजी दिखाते है उतने मैदानी वन अधिकारी-कर्मचारी नहीं। इसके चलते लघु वनोपज का 99 प्रतिशत व्यापार बिचौलियों के हाथों में हैं। वे वनवासियों से अत्यंत कम मूल्य पर वनोपज खरीदते हैं। इससे कभी भी इन लोगों की आर्थिक स्थिति सुधर नहीं रही है। ये लोग कीमती वन संपदा होने पर भी गरीब बने हुए हैं और बिचौलिए लाखों-करोड़ों रुपए के मालिक बनते जा रहे हैं। विभाग आर्थिक असमानता को समाप्त करने में नाकाम रहा है।

78 क्विंटल अचार गुठली की खरीदी
वन विभाग के रिकॉर्ड में समर्थन मूल्य पर केवल 78 क्विंटल अचार गुठली का रिकॉर्ड है। इसके अलावा दूसरी लघु वनोपज भी कम मात्रा में खरीदी गई है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि अधिकांश व्यापारियों द्वारा इस लघु वनोपज व्यापार को जैव विविधता एक्ट के तहत रजिस्टर्ड भी नहीं किया गया है। इससे शासन को भी जैव विविधता शुल्क भी नहीं मिल पा रहा है।

राज्य शासन द्वारा घोषित 32 लघु वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए तीनों डिविजन के प्रबंध संचालकों को पत्र लिखा गया है। जिसमें लघु वनोपज के बाजार मूल्य पर नजर रखने, अपनी दुकानों से खरीदी करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही लक्ष्य अनुसार खरीदी की समीक्षा भी की जाएगी।
-केके भारद्वाज,सीसीएफ छिंदवाड़ा।

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