दो वर्ष में 700 से अधिक शिशुओं और 31 प्रसूता की मौत, जानें वजह

- सिम्स से सम्बद्ध जिला अस्पताल के गायनिक विभाग का मामला

By: Dinesh Sahu

Published: 14 Jan 2021, 10:13 AM IST

छिंदवाड़ा/ छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस से सम्बद्ध जिला अस्पताल के गायनिक विभाग के लिए भलेहि वर्ष बदल गया है, पर यहां मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों में कोई कमी नहीं आई हैं। इसकी वजह वर्ष 2019 में 354 शिशुओं तथा वर्ष 2020 में 355 शिशुओं की मौत हुई।

इतना ही नहीं वर्ष 2019 में 14 तो 2020 में 17 प्रसूताओं की मौत उपचार के दौरान दर्ज की गई। जबकि उक्त दोनों वर्ष में से वर्ष 2020 में 709 डिलेवरी कम हुई, जिसके बाद भी मौत के आंकड़ों में बदलाव नहीं देखा गया। गायनिक विभाग द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में 11033 प्रसव हुए, जिनमें 3295 सीजर शामिल हैं।

वहीं वर्ष 2020 में 10324 प्रसव हुए, जिनमें 3061 सीजर शामिल हैं। दोनों ही वर्षों में मार्च माह में सबसे अधिक चार शिशु की मौत दर्ज की गई। चिकित्सा अधिकारी मातृ एवं शिशुओं की मौत की वजह समय से पहले प्रसव, एनीमिया रोग, झटके आना, बीपी समेत कई वजह बताते है। उल्लेखनीय है कि जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर पर कमी लाने के लिए प्रशासन और चिकित्सा अमला हर बार दावा करता है, पर उक्त रिपोर्ट सभी दावों की पोल खोल रही हैं।


जीवित जन्म में आया 716 का अंतर -


गायनिक विभाग में पिछले दो वर्षों के आंकड़ों की तुलना करने पर वर्ष 2019 की अपेक्षा 2020 में कम प्रसव हुए तथा जीवित शिशु जन्म में भी 716 का अंतर सामने आया हैं। वर्ष 2019 में कुल जीवित जन्म 10812 हुए, जबकि वर्ष 2020 में 10096 जीवित शिशुओं ने जन्म लिया। इसी बीच 2019 में 216 तो वर्ष 2020 में 126 मरीज उच्चस्तरीय उपचार के लिए अन्यत्र सेंटर रैफर किए गए।


फैक्ट फाइल -


विवरण वर्ष 2019 वर्ष 2020


कुल डिलेवरी 11033 10324


नार्मल डिलेवरी 7738 7263


सीजर डिलेवरी 3295 3061


जीवित जन्मे शिशु 10812 10096


मृत जन्मे शिशु 354 355


गायनिक विभाग से रैफर 216 126


गायनिक विभाग में प्रसूता की मौत 14 17

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