बच्चों को स्कूल नहीं भेजने पर बिफरी मां

बच्चों को स्कूल नहीं भेजने पर बिफरी मां

Sanjay Kumar Dandale | Publish: Apr, 21 2019 06:00:00 PM (IST) Chhindwara, Chhindwara, Madhya Pradesh, India

पति बच्चो को स्कूल में भर्ती कराने में रूचि नहीं लेता है और स्कूल की औपचारिकता पूरी नहीं कर रहा है जिसके कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे है।

परासिया. परिवार परामर्श केन्द्र में पत्नी द्वारा की गई शिकायत में बताया गया कि उसका पति पेशे से ड्रायवर है और शराब बेचने का काम भी करता है। वह हमेशा शराब के नशे में रहता है और पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करता है। उनके बच्चे स्कूल जाने योग्य हो गए है लेकिन पति बच्चो को स्कूल में भर्ती कराने में रूचि नहीं लेता है और स्कूल की औपचारिकता पूरी नहीं कर रहा है जिसके कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे है।
कांउसलरो की समझाइश पर पति ने शराब नहीं पीने तथा बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने का वायदा किया जिसके बाद पत्नी साथ जाने को राजी हो गई। कांउसलरों ने पंद्रह दिन बाद परामर्श केन्द्र में आकर स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा।
एक अन्य मामले में विवाह के लगभग डेढ़ वर्ष बाद दांपत्य जीवन में दरार आने लगी। पति द्वारा पत्नी को बारबार मायके जाने से रोकने पर विवाद हो गया इनकी आठ माह की बच्ची है। पत्नी का कहना था कि वह मायके अपने बीमार माता पिता की देखभाल करने जाती है। वहीं पति ने बताया कि वह कई बार पत्नी के साथ सास-ससुर का हालचाल लेने गया है। कांउसलरों ने दोनों को आपसी बातचीत से समन्वय बनाने के लिए कहा और अगली सुनवाई तिथि में उपस्थित होने के लिए कहा। दूरस्थ पहाडी अंचल से आए एक प्रकरण में पत्नी ससुराल नहीं जा रही थी। सुनवाई में पत्नी ने बताया कि उसका पति शराब बनाकर पीता है और नशे में उसके साथ मारपीट करता है तंग आकर वह मायके में रहकर मजदूरी करती है और अपने दो बच्चो का पालन पोषण कर रही है। पति ने त्योहार में शराब बनाकर पीने की बात स्वीकार की और कहा कि वह हमेशा नशा नहीं करता है। इस मामले को लेकर सामाजिक पंचायत भी हो चुकी है। कांउसलरों ने दोनों को समझाया तथा सहमति बनाकर अगली सुनवाई में आने के लिए कहा। एक प्रकरण में पत्नी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि वह ससुराल में परिवार के साथ नहीं रहेगी उसको अलग रखना पडेगा। पत्नी का आरोप था कि ससुराल पक्ष के लोग उसे मानसिक शारीरिक प्रताडना देते है इसलिए वह अलग रहना चाहती है। पति ने बताया कि वह माता पिता की इकलौती संतान है। कांउसलरो के समझाने पर उनके बीच आपसी समझौता हुआ पति ने पत्नी को अलग रखने पर सहमती व्यक्त की और अपने माता पिता की देखभाल करने, मधुर संबंध रखने का वायदा किया। दोनो को अगली सुनवाई तिथी में अपने दांपत्य जीवन की स्थिति बताने के लिए कहा गया। केन्द्र में कांउसलर केशव पांडे, चित्रा विश्वकर्मा, शांति तिवारी, अधिवक्ता सुशीला झाडे, डेस्क प्रभारी एस बरबडे उपस्थित रही।

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