Municipal Corporation: जिम्मेदारों ने सुविधाओं पर लगाया ताला, भटक रहे मरीजों के परिजन

अस्पताल में सोने के लिए जगह तलाश रहे मरीजों के परिजन, कहीं मंदिर तो कहीं फर्श पर लेटने की मजबूरी

By: prabha shankar

Published: 15 May 2021, 10:42 AM IST

छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में मरीजों के परिजन के लिए रहने के कोई इंतजाम नहीं हैं। उन्हें मजबूरी में या तो अस्पताल परिसर के फर्श पर सोना पड़ रहा है या फिर अनगढ़ हनुमान मंदिर में शरण लेनी पड़ रही है। नगर निगम का रैन बसेरा है, लेकिन उस पर स्वास्थ्य विभाग का ताला लगा हुआ है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में इस समय जिला अस्पताल में करीब 350 मरीज संक्रमित होकर इलाज करा रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रसव, एक्सीडेंट समेत सामान्य मरीजों की संख्या करीब 200 प्रतिदिन होती है। क ोविड वार्ड में मरीजों के परिजन घुस नहीं सकते। ऐसे में वे या तो नीचे फर्श पर सो रहे हैं या फिर अपने वाहनों के अंदर किसी तरह रात काट रहे हैं। इसके अलावा अनगढ़ हनुमान मंदिर में भी कुछ परिजन को सोते देखा गया है। इतना बड़ा अस्पताल होने के बाद भी प्रबंधन ऐसे भटकते परिजन के लिए कुछ नहीं कर पा रहा है। नगर निगम का रेन बसेरा अस्पताल के गेट नम्बर चार पर है तो उसमें नसबंदी शिविर के नाम पर स्वास्थ्य विभाग पिंडरई कलां ब्लॉक का कब्जा है। इस समय नसबंदी शिविर बंद है फिर भी विभाग का ताला लटका नजर आ रहा है। परिजन का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में इस भवन में मरीजों के परिजन को रात के समय रहवास दिया जा सकता है। जिस पर प्रशासन को पहल करने की जरूरत है।

अस्पताल से दूर कलेक्ट्रेट का रैनबसेरा
निगम का दूसरा रैन बसेरा ठीक कलेक्टर कक्ष के सामने बनाया गया है। यह अक्सर खाली पड़ा रहता है। यहां भी मरीजों के परिजनों को ठहराया जा सकता है। यह जिला अस्पताल से आधा किमी दूर है। इमरजेंसी के हालात में परिजन ठहर नहीं पाते। उन्हें मरीज के आसपास ही ठहरना पड़ता है।

भवन में एलएलटी शिविर का सामान
न गर निगम के अधीन इस भवन का एक हिस्सा पिंडरई कलां ब्लॉक को दिया गया है। पहले नसबंदी शिविर में इसका उपयोग होता था। कोरोना संक्रमण काल में यह बंद पड़ा है। केवल उसमें शिविर का सामान भरकर रखा गया है। इस भवन को प्रशासन खाली कराए तो परिजन को राहत मिल सकती है।

इनका कहना है
जिला अस्पताल में मरीजों के परिजन के ठहरने के इंतजाम नहीं हैं। निगम के रैन बसेरा के संबंध में जानकारी जुटाकर विचार किया जाएगा।
-डॉ.पी. गोगिया, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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