Music day: जन्म से ब्लाइंड इस युवा को सुनकर आप भी कहेंगे वाह उस्ताद वाह

21 वर्षीय करनेश यादव जन्म से ब्लाइंड हैं

By: ashish mishra

Updated: 21 Jun 2021, 12:51 PM IST

छिंदवाड़ा. कमजोरियों, अभाव के बहाने उनके लिए होते हैं जो कुछ करना नहीं चाहते, जो करना चाहते हैं वे हर समस्याओं का समाधान निकाल लेते हैं और एक दिन सफलता उनके कदम चुमती है। नूरी मस्जिद के सामने यादव कॉलोनी, छिंदवाड़ा निवासी 21 वर्षीय करनेश यादव जन्म से ब्लाइंड हैं, लेकिन उन्होंने इसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। संगीत को अपनाया और उसे ही हथियार बना लिया। करनेश तबला वादक के साथ एक अच्छे गायक भी हैं। करनेश ने महज 16 वर्ष की उम्र में रतलाम में आयोजित राज्यस्तरीय संगीत प्रतियोगिता में अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया और गायन विधा में सभी का दिल जीतते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2018 में उन्हें भारत भवन भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में सेकंड रविन्द्र जैन की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में पांच देशों के प्रतिभागी शामिल हुए थे। करनेश नित्य सफलता की सीढ़ी चढ़ते जा रहे हैं। करनेश ने बताया कि संगीत की प्रेरणा उन्हें माता-पिता से मिली। मम्मी पार्वती यादव गायक हैं और ढोलक बजाती हैं। पिता मुन्ना यादव को संगीत सुनना बहुत पसंद है। घर में माहौल होने से उन्हें बचपन से संगीत के प्रति लगाव रहा। करनेश की एक बड़ी बहन एवं एक छोटा भाई है। करनेश कहते हैं कि संगीत मुझे बहुत सुकुन का एहसास दिलाता है। बहुत आनंद आता है। मैं संगीत से सभी टेंशन भूल जाता हूं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा दुख है की मैं अंधा हंू, लेकिन संगीत इस दुख से मुझे निजात दिलाता है। करनेश इस समय म्यूजिक से ग्रेजुएशन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगीत के प्रति लगाव देखकर पांच वर्ष की उम्र में माता-पिता ने मुझे संगीत सिखाने का निर्णय लिया। मैंने गुरु शशिकांत सरदेशपांडे से संगीत की शिक्षा ले रहा हूं।

कैप्सुल की तरह इस्तेमाल होगी संगीत
करनेश को संगीत का प्रोफसर बनना है। वे कहते हैं कि इस समय हर आदमी एक तनावपूर्ण जीवन जी रहा है। आने वाले समय में स्थिति और खराब होगी। ऐसे में संगीत डिप्रेशन से बचाने का एकमात्र उपाय होगा। उन्होंने बताया कि संगीत थेरेपी के माध्यम से कैंसर जैसी बीमारी का इलाज भी संभव हो चुका है। आने वाले समय में लोगों को डिप्रेशन से बचाने के लिए एक कैप्सूल की तरह संगीत का इस्तेमाल किया जाएगा।


सभी को रखना चाहिए संगीत से लगाव
करनेश कहते हैं कि संगीत अपनाने के बाद मुझे कभी यह एहसास नहीं हुआ कि मैं अंधा हूं। जब भी कभी महसूस होता है तो मैं संगीत के शरण में पहुंच जाता हूं। करनेश कहते हैं कि संगीत मानव जीवन का अभिन्न अंग हैं। यह जन्म से मृत्यु तक हमशे जुड़ा रहता है। यह सुकुन के साथ डिप्रेशन से राहत दिलाता है। संगीत से हम ईश्वर की भी अनुभूति कर सकते हैं। इसलिए हर इंसान को संगीत के प्रति लगाव रखना चाहिए।

ashish mishra Desk
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