अंतिम प्रकाशन में नाम, फिर भी बना दिया अपात्र

vinay purwar

Publish: May, 18 2018 12:42:07 PM (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
अंतिम प्रकाशन में नाम, फिर भी बना दिया अपात्र

नगरनिगम: स्थापना एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा . दैनिक वेतन भोगी कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे हैं। इसमें स्थापना व स्वास्थ्य विभाग तक कठघरे में खड़े हो सकते हैं। छह माह से अधिक समय से चल रही प्रक्रिया अब मनमर्जी से चलने लगी। दरअसल साढ़े चार सौ से अधिक दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को स्थापना विभाग ने अपनी पहली प्रकाशन सूची में जगह दी। इसके बाद दावा-आपत्ति बुलाई गई। तब जाकर अंतिम सूची बनी और उसका प्रकाशन हुआ। इस अंतिम प्रकाशन की सूची में प्रथम प्रकाशन के कई कर्मचारी दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में हटा दिए गए, लेकिन दस कर्मचारी ऐसे सामने आए हैं जिन्हें अंतिम प्रकाशन में शामिल न करने के बाद भी इस माह स्थाई कर्मी की सूची में जगह दे दी गई जबकि आठ ऐसे हैं जिन्हें अंतिम सूची में शामिल करने के बाद भी अभी तक स्थायी नहीं किया गया है।

2001 से कर रहे हैं काम
दैवेभो कर्मचारी नीरज डागोर ने बताया कि वह २००१ से काम कर रहे हैं और उन्हें 2002 में ही वरिष्ठता क्रमांक 208 मिल चुका है। वे 2001 से 2006 तक के मस्टर की कॉपी पेश कर चुके हैं। मार्च में अंतिम प्रकाशन में वरिष्ठता क्रमांक 324 वां नम्बर है। इसके बावजूद झूठी शिकायतों के आधार पर उन्हें लाभ से वंचित रखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अंतिम प्रकाशन के पत्र क्रमांक 1294 में स्पष्ट लिखा भी है कि अंतिम प्रकाशन में साक्ष्यों के आधार पर दावे आपत्तियों के आधार पर सुनवाई की गई। उसके बाद ही सूची अंतिम प्रकाशन के लिए मान्य की गई है।

अंतिम प्रकाशन के बाद भी हो चुके हैं बाहर
वरिष्ठता क्रमंाक नाम
371 धीरज पिता प्रेम गोहर
385 रिक्की पितागणेश
326 अजय पिता ब्रजमोहलन
414 राज पिता रघुवीर
317 आकाश पिता रूपलाल
100 प्रमिला पति सतीश
347 देशराज पिता नरेन्द्र

सफाई कर्मचारी महासंघ के जिला संयोजक जगदीश गोदरे ने बताया कि आठ लोगों के नाम अंतिम प्रकाशन की सूची में शामिल हैं फिर भी उन्हें स्थाईकर्मी का आदेश नहीं मिला है। उन्हें अब भी जांच प्रक्रिया के नाम पर रोका जा रहा है। मस्टर की कॉपी कर्मचारियों से मंगाई जाती है जबकि इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थापना एवं सम्बंधित विभाग की होती है। उनकी लापरवाही का नुकसान कर्मचारी क्यों उठाएं। जिन कर्मचारियों के गैप हुए हैं उन्होंने भी आवेदन और मेडिकल दिया है। उनके कागजात भी रखने की जिम्मेदारी विभाग पर भी होती है।

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अधिकारी क ी ही आपत्ति पर रोक लगाई गई थी, अब वही अनुशंसा कर रहे हैं। फिलहाल नियुक्ति की जांच प्रक्रियाधीन है। इसलिए इन्हें अभी तक नियुक्ति आदेश नहीं मिले हैं।
आरएस बाथम, सहायक आयुक्त

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