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समाज की बदली सोच और बन गया रिकॉर्ड

अब बेटियों के जन्म पर मनाई जाती है खुशी

छिंदवाड़ा

Published: January 13, 2022 07:20:51 pm

मंतोष कुमार सिंह
छिंदवाड़ा. बेटों से बेटियां कम नहीं होतीं, इसे अब समाज भी स्वीकार करने लगा है। इसका असर लिंगानुपात पर देखने को मिल रहा है। बेटियों के जन्म दर में तेजी से सुधार हो रहा है। महिला-पुरुष लिंगानुपात में सिवनी जिला जबलपुर संभाग में टॉप पर है। जिले में एक हजार पुरुषों पर सबसे ज्यादा 1089 महिलाएं हैं। बेटियों की जन्म दर में भी जिले की स्थिति काफी अच्छी है। यहां पर एक हजार बेटों पर 1212 बेटियां जन्म ले रही हैं।

समाज की बदली सोच और बन गया रिकॉर्ड
समाज की बदली सोच और बन गया रिकॉर्ड

नरसिंहपुर और डिंडोरी जिले बेटियों की जन्म दर के मामले में सबसे निचले पायदान पर हैं। जबलपुर संभाग में पिछले पांच साल में महिला-पुरुष लिंगानुपात में सुधार हुआ है। पांच जिलों में महिला लिंगानुपात एक हजार से ज्यादा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, मंडला और सिवनी में महिला लिंगानुपात की स्थिति काफी बेहतर है। जबलपुर और नरसिंहपुर में भी पुरुषों की अपेक्षा महिला लिंगानुपात अधिक है। सिर्फ कटनी में 996 पुरुषों पर 979 महिलाएं हैं। यह खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है।

जागरुकता और साक्षरता मुख्य वजह
लिंगानुपात और जन्म दर में सुधार के पीछे कई कारण हैं। समाज की सोच में परिवर्तन हुआ है। बेटियों को बेटों के बराबर का दर्जा मिलने लगा है। बेटियों के पैदा होने पर अब दुख नहीं खुशी मनाई जाती है। महिलाओं में जागरुकता आई है। पढ़ाई-लिखाई के प्रति रुझान बढ़ा है। यही वजह है कि सिवनी जिले की 71.60 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हो गई हैं। 2015-16 में छह साल से अधिक आयु वाली 68.60 प्रतिशत लड़कियां ही स्कूल जा रही थीं। 2019-21 स्कूल जाने का प्रतिशत बढकऱ 71.30 हो गया है। कम उम्र में शादी की दर में भी गिरावट आई है। यह 17.30 से घटकर 11.20 प्रतिशत हो गई है।


लोगों को किया गया जागरूक
केन्द्र सरकार की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना के तहत टीम बनाकर गांव-गांव कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों को जागरूक किया गया।
- अभिजीत पचौरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सिवनी

जिले में संचालित उन सभी स्थानों पर सघन निगरानी की जा रही है, जहां सोनोग्राफी होती है। इसके लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। इससे भ्रूण हत्या पर काफी रोक लगी है।
- डॉ. राजेश श्रीवास्तव, सीएमएचओ सिवनी

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